त्रेता युग की मिथिला बनी काशी, चारों भाइयों के बराती बने वासी, श्रवण नक्षत्र में निभाई गई श्रीराम विवाह की रस्में

शिव की नगरी काशी बुधवार की शाम सूर्य की लालिमा मद्धिम पड़ते ही जनकपुरी की छवि में रंगी नजर आई। अवसर था भगवान श्रीराम के पाणि ग्रहण संस्कार का। इसके साक्षी बने स्वयं भगवान शिव। अवधेश कुमार के विवाहोत्सव पर शिव की नगरी में जमकर खुशियां मनाई गईं।

Saurabh ChakravartyWed, 08 Dec 2021 09:30 PM (IST)
असि स्थित राम-जानकी मठ से निकली राम-बारात में शामिल महिलाएं व पुरुष।

वाराणसी। शिव की नगरी काशी बुधवार की शाम सूर्य की लालिमा मद्धिम पड़ते ही जनकपुरी की छवि में रंगी नजर आई। अवसर था भगवान श्रीराम के पाणि ग्रहण संस्कार का। इसके साक्षी बने स्वयं भगवान शिव। अवधेश कुमार के विवाहोत्सव पर शिव की नगरी में जमकर खुशियां मनाई गईं। श्रवण नक्षत्र में प्रभु श्रीराम ने जनक नंदिनी का हाथ थामकर जीवनपर्यंत साथ रहने का संकल्प लिया, तो देवालयों में मंगलगीत के बीच महर्षि गुरु वशिष्ठ, राजा दशरथ, हनुमंत लला और जामवंत इसके साक्षी बने। देर रात काशी नगरी के निवासी बराती के रूप में पंडालों में जिमाए गए। प्रस्तुत है सौरभ चंद्र पांडेय और राजेश त्रिपाठीI

सजाई गई चारों भाइयों के कोहबर की झांकी

अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को रामनगर के जनकपुर मंदिर में श्रीराम-जानकी विवाहोत्सव पर चारों भाइयों के कोहबर की अद्भुत झांकी सजाई गई। इस नयनाभिराम झांकी के दर्शन के लिए आस्थावानों की भारी भीड़ उमड़ी रही। देर रात चारों भाइयों के विवाह की रस्म को विधि-विधान से उत्साह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर खाझा, लड्डू, बताशा, पूड़ी-सब्जी आदि व्यंजनों का भोग लगाया गया। रामचरितमानस के बालकांड का राम-विवाह की चौपाइयों का गायन मानो कलयुग में साक्षात त्रेतायुग का अवतरण कर दिया हो ऐसा प्रतीत हो रहा था। विश्व में प्रभु श्रीराम का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां प्रभु श्रीराम चारों भाइयों के साथ गर्भ गृह में विराजते हैं।

फूलों से सजी पालकी और गाजे-बाजे संग निकली बरात

अस्सी स्थित श्रीरामजानकी मठ के तत्वावधान में श्रीराम विवाहोत्सव पर भव्य बरात निकाली गई। इसमें गाजे-बाजे के साथ घोड़ा-बग्घी और रथ पर फूलों से सुसज्जित पालकी में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के दूल्हे के स्वरूप विराजमान थे। आस्थावानों ने जगह-जगह बरात का स्वागत किया। बरात में मंगल गीत के साथ-साथ भगवान का स्तुति गान भी हो रहा था। यह यात्रा मठ से प्रारंभ होकर अस्सी चौराहा, लंका, संकटमोचन मार्ग, मानस मंदिर, दुर्गाकुंड व रवींद्रपुरी होते हुए पुनः मठ पहुंची। वहां श्रीराम बारात का स्वागत समाजसेवी हेमल शाह, विजय गुप्ता, ललिता विश्वनाथ सरावगी ने की। द्वारचार की रस्म के बाद मठ में श्रीराम जानकी के विवाह की परंपरा का निर्वहन किया गया। जयमाल के बाद माता जानकी के माता-पिता के रूप में पूजा आदर्श सरावगी ने कन्यादान किया। इस दौरान महिलाओं ने मंगल गीत जानकी मंगल में सब मंगल टूटत ही धनु भयेहु बिवाहु गीत गाया। रात में रामकलेवा का भोग लगाया गया। उधर खोजवां स्थित श्रीराम मंदिर में द्वाराचार स्वामी रामकमल दास वेदांती महाराज के सानिध्य व श्रीरामनंदविश्व हितकारिणी परिषद के तत्वावधान में श्रीसीताराम विवाह महोत्सव मनाया गया। यहां दोपहर में श्रीराम बरात निकाली गई। बरात मंदिर से आरंभ होकर कश्मीरीगंज, खोजवां, नवाबगंज, गुरुधाम होते पुनः मंदिर पहुंची। बारात में संत पुरुषोत्तम दास ,संत सुखदेव दास, संत सर्वेश दास शामिल हुए। बरात का स्वागत हितकारिणी सभा के मंत्री रामभरत शास्त्री ने किया।

फूलों से सजा प्रभु श्रीराम का मड़वा

रामकटोरा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में पांच दिवसीय विवाह महोत्सव पर मंदिर के आंगन में प्रभु श्रीराम के विवाह का मड़वा फूलों से सजाया गया। इस अद्भुत सज्जा से श्रद्धालुओं की दृष्टि नहीं हट रही थीं। महंत सुरेश दास महाराज ने बताया कि 150 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत विवाह पंचमी पर दोपहर में हल्दी, मातृका पूजन, शाम को प्रभु का विवाह महोत्सव मनाया गया। अध्यक्ष पं. पद्माकर पाठक ने बताया कि दस दिसंबर को विशाल भंडारा का आयोजन किया जाएगा।

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