दैनिक जागरण समूह के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्त के निधन पर जागरण परिवार शोकाकुल

दैनिक जागरण नदेसर दफ्तर में आयोजित शोकसभा में दो मिनट का मौन रख कर आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। निदेशक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दैनिक जागरण को ऊंचाई पर ले जाने में योगेंद्र मोहन का महती योगदान था।

Abhishek SharmaSat, 16 Oct 2021 02:41 PM (IST)
दैनिक जागरण नदेसर में शोकसभा में दो मिनट का मौन रख कर आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। दैनिक जागरण समूह के चेयरमैन योगेंद्र मोहन गुप्त के निधन से शोकाकुल जागरण परिवार ने शनिवार सुबह श्रद्धा सुमन समर्पित किए। दैनिक जागरण के नदेसर स्थित दफ्तर में आयोजित शोक सभा में दो मिनट का मौन रख कर उनकी आत्मा शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। निदेशक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि दैनिक जागरण को ऊंचाई पर ले जाने में योगेंद्र मोहन का महती योगदान था। वहीं जीएम अंकुर चड्ढा ने भी पुष्‍पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। 

उन्होंने अखबार को ऊंचाई देने के साथ ही लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी के और पूर्णचंद्र गुप्त स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में अंतिम समय तक पूरी सक्रियता से काम किया। इसका परिणाम रहा कि उनके निर्देशन में अखबार तो समृद्ध हुआ ही ट्रस्ट ने शिक्षा के क्षेत्र में भी ख्याति अर्जित की। आज बनारस, कानपुर समेत विभिन्न स्थानों पर जागरण के शिक्षण संस्थान ज्ञान गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। बेहद सरल व सहज स्वभाव वाले योगेंद्र मोहन जी अपनों के बीच सोहन बाबू के नाम से जाने जाते थे। जागरण परिवार के अन्य सदस्यों ने भी योगेंद्र मोहन जी के व्यक्तित्व व कृतित्व को स्मरण किया।

जागरण समूह के चेयरमैन योगेंद्र मोहन का शुक्रवार सुबह निधन हो गया था। वह 85 वर्ष के थे। पिछले कुछ समय से कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे, वहां ही इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। सुबह कानपुर के भैरो घाट पर अंत्येष्टि की गई। मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र सुनील गुप्ता ने दी। योगेन्द्र मोहन के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल आनंदी बेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही राजनेताओं, अधिकारियों व संत-महंतों ने शोक जताया है। महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा ने शोक संवेना जताते हुए कहा कि योगेंद्र बाबू ने श्रम को साधना मानते हुए कर्म किया। इसका प्रतिफल है कि दैनिक जागरण एक वट वृक्ष के रूप में समाज को छांव दे रहा है। काशी अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत शंकर पुरी ने कहा कि योगेंद्र मोहन जी की कर्म में आस्था तो धर्म के प्रति श्रद्धा थी। इसके समन्वय से ही उन्होंने दैनिक जागरण को ऊंचाई दी।

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