देश का वातावरण बिगाडऩे के लिए कुछ लोग कर रहे फंडिंग विपक्षी दलों के गैरजिम्मेदाराना आचरण : रूपा गांगुली

कुछ राजनीतिक दल व उनके नेता देश के विकास में रोड़ा डालना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को उन्नति के शिखर पर ले जाने का कार्यक्रम उन्हें रास नहीं आ रहा। तभी तो हंगामा करके वे संसद भी नहीं चलने देते।

Saurabh ChakravartyThu, 16 Sep 2021 12:10 AM (IST)
राज्यसभा सदस्य और अभिनेत्री रूपा गांगुली मीडिया से बात करते हुए।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। कुछ राजनीतिक दल व उनके नेता देश के विकास में रोड़ा डालना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश को उन्नति के शिखर पर ले जाने का कार्यक्रम उन्हें रास नहीं आ रहा। तभी तो हंगामा करके वे संसद भी नहीं चलने देते। ऐसे ही लोग देश का वातावरण बिगाडऩे के लिए फंडिंग कर रहे हैं। यह बातें राज्यसभा सदस्य, अभिनेत्री, दूरदर्शन के महाभारत की द्रौपदी रूपा गांगुली ने कही।

सिद्धगिरि बाग स्थित श्रीब्रह्मनिवास में बुधवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध में विपक्षी दलों को समझ में नहीं आता कि उन्हें भी इसी धरती पर जीना है। देश के विकास और यहां के नागरिकों की सुविधाओं के लिए लाए जाने वाले विधेयक को पारित नहीं होने देना, उनकी गैरजिम्मेदाराना प्रवृत्ति का परिचायक है। उनके आचरण से दुख होता है। इसीलिए संस्कृति संसद जैसे आयोजन जरूरी हैं।

प. बंगाल में तानाशाही, मैं खुद प्रताडि़त

रूपा ने कहा कि प. बंगाल में तानाशाही है। वोट बैंक के लिए ममता बनर्जी बंगाल की संस्कृति, सभ्यता और मानुष को कुचलने पर आमादा हैं। राजनीतिक विरोधियों की चुन-चुन कर हत्या की जा रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं। मेरे बाल कभी बहुत लंबे और भारी थे। तृणमूल के गुंडों ने गाड़ी से खींचकर जमीन पर गिराकर इतना मारा कि कई ब्रेन हेमरेज हो गए। बाईं आंख की रोशनी कम हो गई। सिर में इतना दर्द रहता है कि बालों का वजन सहा नहीं गया और उन्हें काटना पड़ा।

जमीन खरीदने का संकल्प

रूपा ने बताया कि बंटवारे के बाद पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से हमारे परिवार को विस्थापित होकर आना पड़ा। हमारा घर, खेत, जमीन सब वहीं छूट गए। छोटी थी तभी संकल्प लिया था कि मां-पिताजी के लिए जमीन खरीदूंगी। इसलिए स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती के नेतृत्व में सनातन संस्कृति को बचाने के अभियान पर निकली हूं।

बनारस है बंगालियों का दूसरा होम टाउन

उन्होंने कहा कि बनारस बंगालियों का दूसरा होम टाउन है। हर बंगाली यहां एक घर बनाना चाहता है। काशी के प्रति वहां के लोगों के मन में अपार श्रद्धा का भाव है। मैं जब से यहां आई हूं, मेरी मां ने पांच बार फोन किया कि तू काशी पहुंच गई। वहां मंदिरों में दर्शन-पूजन अवश्य करना।

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