वाराणसी जिला अस्पताल में उद्योगपति आरके चौधरी लगवाएंगे 15 दिन में ऑक्सीजन प्लांट, मरीजों को मिलेगी सुविधा

वाराणसी में अगले 15 दिन में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित भी हो जाएगा।

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पं. दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन प्लांट लगवाने की बात कही है। वाराणसी में अगले 15 दिन में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित भी हो जाएगा।

Saurabh ChakravartyTue, 20 Apr 2021 11:18 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। जिले के उद्योगपति इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आरके चौधरी ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पं. दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय में ऑक्सीजन प्लांट लगवाने की बात कही है। उनकी इस पहल पर मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल एवं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने तत्परता दिखाते हुए मंगलवार को ही कार्रवाई शुरू कर दी। शाम होने तक प्लांट लगाने के लिए औपचारिक आर्डर भी दे दिया गया। ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना में करीब एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। अगले 15 दिन में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित भी हो जाएगा।
बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय में कुल 200 मरीजों के भर्ती की क्षमता है। वर्तमान में यह अस्पताल कोविड एल-2 अस्पताल के रूप में कार्य कर रहा है। ऑक्सीजन की कमी के कारण अस्पताल में इस समय 110 बेड पर ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। प्लांट लग जाने के बाद पूरे 200 बेड पर मरीज भर्ती किए जा सकेंगे।

मंडलीय अस्पताल में 1.10 करोड़ में लगेगा आक्सीजन प्लांट, मांगे गए हैं प्रस्ताव

कबीरचौरा स्थित श्रीशिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय में 1.10 करोड़ रुपये की लागत से आक्सीजन प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिसकी क्षमता रोजाना 88 सिलेंडर की होगी। प्रभारी एसआइसी डा. हरिचरण ने रविवार को इसका प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन को भेज दिया। वर्तमान में चंदौली से रीफिल कराकर आक्सीजन सिलेंडर अस्पताल में लाना पड़ता है, जिसमें समय व श्रम दोनों की बर्बादी होती है।

मंडलीय अस्पताल के नए अष्टकोणीय भवन का प्रस्ताव हाल ही में शासन को भेजा गया था। ऐसे में यहां आक्सीजन प्लांट लगना भविष्य के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। मंडलीय अस्पताल के अलावा सेंट्रल हास्पिटल बरेका व दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय से भी आक्सीजन प्लांट का प्रस्ताव मांगा गया है। कोरोना की दूसरी लहर में आक्सीजन युक्त बेड की किल्लत को देखते हुए सरकार भविष्य की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। मंडलीय अस्पताल से एक बार में 35 से 40 खाली सिलेंडर चंदौली स्थित री-फिलिंग प्लांट ले जाना होता है। वहां इन सिलेंडर को छोड़कर भरा सिलेंडर लाने में आधा दिन निकल जाता है। यही प्रक्रिया दोपहर बाद दोहराई जाती है। इसमें समय व श्रम दोनों जाया होते हैं। प्लांट लगने न केवल समय पर आक्सीजन की उपलब्धता होगी, बल्कि अनावश्यक श्रम भी नहीं करना होगा।

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