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फेफड़े की क्षमता को बढ़ाता है एस्पीडोस्पर्मा क्यू, रक्त के आक्सीकरण और कार्बन डाइआक्साइड के निष्कासन में होती है वृद्धि

डॉ अनिल कुमार गुप्ता, होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, राजकीय जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय,भेलूपुर,वाराणसी

एस्पीडोस्पर्मा क्यू फेफड़े की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है जो निश्चित तौर पर कोरोना पीड़ितों और उनके परिवारीजनों के लिए राहत की बात है। मगर जब शरीर को अधिक मात्रा में आक्सीजन की जरूरत होती है वहां यह उतना प्रभावी नहीं है।

Saurabh ChakravartyMon, 03 May 2021 06:30 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। संकट के इस समय में हर कोई कुछ न कुछ राहत पाने की तलाश में है। कुछ प्रभावी चिकित्सा एवं कुछ दवाएं रोगियों के लिए उपयोगी भी हैं, बशर्ते उनके बारे में अच्छी मालूमात रखी जाय। इन दिनाें सोशल मीडिया पर बहुत से संदेश वायरल हो रहे हैं और दवाओं को लेकर जानकारियों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। ऐसी ही एक होम्योपैथिक दवा है 'एस्पीडोस्पर्मा क्यू', जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इसे लेने से शरीर में आक्सीजन की कमी नहीं होगी। राजकीय जिला होम्योपैथिक चिकित्सालय-भेलूपुर के चिकित्साधिकारी डा. अनिल कुमार गुप्ता के मुताबिक 'एस्पीडोस्पर्मा क्यू' प्रभावी जरूर है, लेकिन यह आक्सीजन का विकल्प नहीं है।

'एस्पीडोस्पर्मा क्यू' फेफड़े की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है, जो निश्चित तौर पर कोरोना पीड़ितों और उनके परिवारीजनों के लिए राहत की बात है। मगर जब शरीर को अधिक मात्रा में आक्सीजन की जरूरत होती है, वहां यह उतना प्रभावी नहीं है। कोरोना पाजिटिव मरीजों के लिए एस्पीडोस्पर्मा क्यू एक बेस-लाइन सपोर्ट दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मसलन जिन मरीजों को बुखार और खांसी हो, सांस लेने पर सीने में घड़घड़ाहड हो। यह दवा श्वसन केंद्रों को उत्तेजित कर फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है और रक्त के आक्सीकरण एवं कार्बन-डाइऑक्साइड के निष्कासन को बढ़ा देता है। डा. अनिल बताते हैं कि होम्योपैथी लक्षणों के आधार पर कार्य करने वाली सुरक्षित और असरदार चिकित्सा पद्धति है। इस पद्धति में दवाओं का चयन रोगियों के लक्षणों व रोग की प्रकृति के आधार पर किया जाता है, क्याेंकि एक जैसा रोग होने के बाद भी प्रत्येक राेगी के लिए दवा अलग-अलग हो सकती है।

ये दवाएं भी है फायदेमंद 

होम्योपैथी की कुछ अन्य दवाएं जैसे-कार्बो वेज, वैनेडियम, आर्सेनिक एल्बम, इपिकाक, फॉस्फोरस, एकोनाइट, जस्टिसिया, ब्लाट्टा, लोबेलिआ, अरेलिया, ग्रन्डेलिया अादि भी लक्षणों के अनुसार सांस फूलने और श्वसन तंत्र की बीमारियों में अच्छी और प्रभावी हैं। शोध में देखा गया है कि ये दवाएं, उन मामलों में भी अच्छे परिणाम देती हैं जहां हाइपोक्सिया या एयर हंगर की तरह हवा के लिए हांफने का कारण या स्थिति रही है या जब एक कोविड रोगी सांस और ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहा है। डा. अनिल कहते हैं कि ये दवाएं प्रभावी हैं और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस में मरीजों की मदद करती हैं। बावजूद इसके आक्सीजन के विकल्प के तौर पर इन्हें बिना चिकित्सीय परामर्श के नहीं लेना चाहिए।

ये हैं होम्योपैथी के सिद्धांत 

- कोई भी होम्योपैथिक दवा सिर्फ लक्षणों के आधार पर ही किसी भी रोगी को लाभ कर सकती है।

- कोई एक दवा हर रोगी के काम नहीं आ सकती।

- हर रोगी की दवा, उसकी मात्रा व कितने समय पर देना है, यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है, जो एक अनुभवी चिकित्सक ही बता सकता है।

- हर रोगी की दवा, उसकी मात्रा आदि उसकी उम्र, स्थिति के आधार पर अलग-अलग होती है।

- कोई भी दवा बिना चिकित्सकीय परामर्श के कतई न लें।

 

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