वाराणसी में अब गांव में माइक्रो एटीएम के जरिए बैंकिंग सेवा से जुटेंगी महिलाएं, होल्डिंग डिवाइस उपलब्‍ध

मुख्‍यमंत्री के निर्देश के क्रम में राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन के तहत गठित महिला समूहों में से एक ग्राम पंचायत में एक बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट तैयार किए जाने की दिशा में कार्य शुरू हो चुका है। ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं को बीसी यानी बैंक सखी का नाम दिया गया है।

Abhishek SharmaSat, 24 Jul 2021 07:00 PM (IST)
ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं को बीसी यानी बैंक सखी का नाम दिया गया है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। मुख्‍यमंत्री के निर्देश के क्रम में राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन के तहत गठित महिला समूहों में से एक ग्राम पंचायत में एक बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट (बीसी) तैयार किए जाने की दिशा में कार्य शुरू हो चुका है। ट्रेनिंग के बाद इन महिलाओं को बीसी यानी बैंक सखी का नाम दिया गया है। अब तक जिले में 419 बीसी सखियां बैंकिंग प्रणाली की ट्रेनिंग प्राप्‍त कर चुकी है। यह माइक्रो एटीएम के जरिए गांव की महिलाओं का पैसा जमा कर सकेंगी वहीं जरूरत पर निकासी भी।

इसी क्रम में वन जीपी वन बीसी यानी एक ग्राम पंचायत एक बैंक कोरेस्पोंडेंट कार्यक्रम अंतर्गत शनिवार को विकास भवन के सभागार में मुख्य विकास अधिकारी मधुसूदन हुल्गी की ओर से तीन बीसी सखियों यानी उषा, दीप मालिका व रोली तिवारी को हैंड होल्डिंग डिवाइस उपलब्ध कराया गया। कार्यकम की शुरूआत करते हुए सीडीओ ने इन महिलाओं की हाैसला आफजाई की। साथ ही आगे ईमानदारी से कार्य करने की नसीहत भी दी। बताया कि जनपद में अब तक कुल 419 बीसी सखियों का आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण कराया जा चुका है । जनपद के नामित पार्टनर बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ बीसी सखी के रूप में पदस्थापित किया जाएगा।

ये बीसी सखियां अपने गांव में बैंकिंग सेवाओं एवं उत्पादों को उपलब्ध कराएंगी तथा डोर स्टेप बैंकिंग को बढ़ावा देगीं। बीसी सखी गांव में किसान सम्मान निधि, मनरेगा मजदूरी, पेंशन, छात्रवृत्ति आदि के पैसे का लेन देन आदि कार्य संपन्न करेंगी इसके सापेक्ष उन्हें अच्छा खासा मुनाफा भी होगा। उक्त अवसर पर बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधि शशि, रोएनेट के प्रतिनिधि संजय, उपायुक्त स्वत: रोजगार, उपायुक्त श्रम रोजगार , परियोजना निदेशक वह जिला मिशन प्रबंधक राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आदि उपस्थित रहे।

बीसी सखी में इंटर पास आवश्‍यक : महिला समूहों में से ही बीसी सखी बनाया जाना है लेकिन इंटर पास होना आवश्‍यक रखा गया है। इसके साथ ही कंप्‍यूटर की जानकारी भी होनी चाहिए। इसके अलावा उक्‍त मह‍िला के नाम पर कोई पुलिस केस नहीं होना चाहिए। ऐसे अभ्‍यर्थी के चयन के पहले एक छोटी सी परीक्षा का आयोजन किया जाता है। परीक्षा पास करने वाली महिलाओं को ही बीसी सखी के पद पर नियुक्‍त कर टृेनिंग दी जाती है। टृेनिंग में सब कुछ ठीक होने के बाद निर्धारित बैंक अपने साथ जोड़ता है।

छह माह तक एनआरएलएम से मिलेगा मानेदय : इन बीसी सखि‍यों को एनआरएलएम यानी राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से चार हजार रुपये छह माह तक मानदेय मिलेगा। इस तरह कुल 24 हजार रुपये इन्‍हें छह माह तक दिया जाएगा। इसके बाद बैंकिंग कार्य में पूरी तरह दक्ष होने के बाद लेन देन पर कमीशन का निर्धारण होगा।

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