वाराणसी में फल-सब्जी के भाव बढ़ रहे तेजी से, नए नियम का फायदा उठा कर बिचौलिए काट रहे चांदी

बाजार में इन दिनों फल से लेकर सब्जी तक सभी चीजों के भाव बढ़े हुए है।

नए कानून के तहत कोई भी व्यापारी अपने पास जितना चाहे उतना स्टॉक रख सकता है। कोई पाबंदी नही है। जबकि इससे पहले ऐसा नही था। कोल्ड स्टोर में स्टॉक रख सकते थे लेकिन इसकी जानकारी सरकारी विभागों के पास हुआ करती थी।

Saurabh ChakravartyWed, 21 Apr 2021 05:16 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। बाजार में इन दिनों फल से लेकर सब्जी तक सभी चीजों के भाव बढ़े हुए है। चाहे मौसमी फल या सब्जियां हो या अन्य। किसी भी चीज का एक बार भाव बढ़ा तो कम होने का नाम नही ले रहा है। कारोबारी कभी प्राकृतिक आपदा तो कभी डीजल के बढ़े भाव का हवाला देकर मनमानी करते है। कारण कुछ भी यह तो साफ है किसान को बढ़े भाव का फायदा नही ग्राहक लूटा जा रहा है और बिचौलिये चांदी काट रहै है। जानकार बताते है कि फल व सब्जियों के भाव पिछले कुछ समय से मनमाने रूप से बढ़ रहे है। इसका कारण नया कानून है।

अपनी मर्जी से माल निकालते है व उसका भाव तय करते

नए कानून के तहत कोई भी व्यापारी अपने पास जितना चाहे उतना स्टॉक रख सकता है। कोई पाबंदी नही है। जबकि इससे पहले ऐसा नही था। कोल्ड स्टोर में स्टॉक रख सकते थे लेकिन इसकी जानकारी सरकारी विभागों के पास हुआ करती थी। बाजार में माल की कमी या माल महंगा होने पर कोल्ड स्टोर से माल निकालना बाध्यता होती थी। अब बड़ी बड़ी कंपनियों ने पैकेट बंद फल बेचने का काम शुरू कर दिया है। जिसके बाद से फल के बाजार पर लगभग इनका नियंत्रण से हो गया है। छोटा कारोबारी इनके आगे टिक नहीं पाता है। लिहाजा ये अपनी मर्जी से माल निकालते है व उसका भाव तय करते है। उदाहरण के तौर पर यदि सेब की बात की जाए तो फुटकर बाजार में सेब 150 से 250 रुपये किलो तक बिक रहा है। जबकि थोक में 100 से 160 रुपये किलो है। पहड़िया मंडी के फल कारोबारी रियाज़ अहमद बताते है कि सेब बहुत महंगा है। इसके कई कारण है। एक तो फसल बहुत अच्छी नही हुई है। दूसरी बड़ी बड़ी सेब की कंपनियों ने सेब खरीद कर डंप कर लिया है।

अब वे अपनी मर्ज़ी से अपने भाव पर माल निकाल रहे है। बड़ी कंपनियों के आगे छोटे व्यापारी टिक नहीं पाते है। इसका खामियाजा व्यापारियों के साथ उपभोक्ता को भुगतना पड़ता है। वैसे तो कश्मीर का सेब पूरी दुनिया मे प्रसिद्ध है लेकिन भारत मे विदेशी सेब की भी मांग बहुत रहती है। भारत मे वाशिंगटन, यूएसए, चीन, चिल्ली, फ़्रांस, ईरान सहित लगभग 40 देशों से सेब की आवक होती थी। लेकिन कस्टम डयूटी बहुत ज्यादा होने के कारण  भारतीय सेब के आगे टिक नहीं पा रहा है। फिलहाल सबसे ज्यादा ईरान से सेब आ रहा है जो कि पोर्ट सिटी में ही 100 से 120 रुपये किलो बिक जा रहा है।

लाल बहादुर शास्त्री कृषि उत्पादन मंडी में नहीं आते किसान

पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी लाल बहादुर शास्त्री कृषि उत्पादन मंडी स्थल पहड़िया है। कहने को तो इसका निर्माण किसानों को लाभ पहुंचने के लिए हुए है। लेकिन यदा कदा ही कोई किसान अपना माल लेकर यहां बेचने आता है। यहाँ सेकंडरी एराइवल ज्यादा है। यानी किसान अपना माल व्यपारियो को बेचते है व्यापारी यहाँ के आढ़तियों की मदद से बेचते है। आढ़तियों को इसकी एवज के तय कमीशन मिलता है।

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