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जौनपुर में समूह की 26 महिलाओं ने स्वाभिमान के साथ जीता ग्रामीणों का विश्वास, ग्राम प्रधान बन करेंगी नेतृत्‍व

पंचायत चुनाव में 26 गांव की महिलाएं प्रधान बन गईं।

जौनपुर में सक्रिय 1527 समूहों से जुड़ी 13 हजार से अधिक महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में लगी हैं। उनकी झिझक को तोड़ने में भी इन्होंने सराहनीय कार्य किया। यही वजह है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 26 गांव की महिलाएं प्रधान बन गईं।

Saurabh ChakravartyTue, 18 May 2021 08:30 AM (IST)

जौनपुर, जेएनएन। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समूहों से जोड़ने की मुहिम रंग लाई। कभी अपनी बात दूसरों के समक्ष रखने में हिचकिचाने वाली महिलाएं अब अपने गांव का प्रतिनिधित्व करेंगी। पंचायत चुनाव में समूह की 26 महिलाओं ने तमाम चुनौतियों को पार करते हुए जीत दर्ज की है। इनके मजबूत हौसले बताते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं, बस जरूरत मौका मिलने की है।

जिले में सक्रिय 1527 समूहों से जुड़ी 13 हजार से अधिक महिलाएं ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में लगी हैं। उनकी झिझक को तोड़ने में भी इन्होंने सराहनीय कार्य किया। यही वजह है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 26 गांव की महिलाओं के साथ ही इन्हें पुरुषों का भी समर्थन मिला और प्रधान बन गईं।

एनआरएलएम का रहा अहम रोल

समूह की महिलाओं को जीत का डंका बजाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने भी विशेष सहभागिता निभाई है। एनआरएलएम की ओर से निष्क्रिय समूहों को न सिर्फ सक्रिय किया गया, बल्कि तरह-तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर सामाजिक कार्यों में इनकी सहभागिता बढ़ाई गई। एनआरएलएम के उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि समूह की महिलाएं अलग-अलग क्षेत्रों में निपुण हैं, जिन्हें उनकी क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। जिला मिशन प्रबंधक गुलाब चंद सरोज ने कहा कि महिला सशक्तीकरण पर संजीदगी से कार्य किया जा रहा है।

प्रधान बनीं समूह की महिलाओं के हौंसले हैं बुलंद 

सिरकोनी ब्लाक की गोपीपुर गांव की निर्वाचित प्रधान आरती सिंह ने वर्ष 2018 में जय मां अंबे स्वयं सहायता समूह का गठन किया। ग्रेजुएट आरती ने समूह के माध्यम से वंचित महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। उनका यह कार्य लोगों को पसंद आया और सबका साथ भी मिला। उन्होंने जीत का श्रेय गांव के सभी लोगों को दिया।

करंजाकला ब्लाक की पतहना गांव से चुनीं गई प्रधान रीता देवी के भी हौसले बुलंद हैं। ग्राम विकास में भागीदारी निभाने के लिहाज से दो वर्ष पूर्व ही इन्होंने चौरामाता स्वयं सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को सशक्त बनाने शुरू कर दिया। सिलाई-कढ़ाई व अन्य कार्यों का प्रशिक्षण दिलाने के लिए ग्रामीण महिलाओं को शहर पहुंचाया। सराहनीय कार्य के लिए उन्हें गांव के लोगों का समर्थन मिला और लोगों के दिलों को जीत वे प्रधान की कुर्सी पर काबिज हो गईं।

मछलीशहर ब्लाक की कोठारी गांव निवासी अमिरता यादव ने भी जीत दर्ज की। विश्वास स्वयं सहायता समूह का गठन कर इन्होंने लोगों का ऐसा विश्वास जीता कि गांव की जनता ने उन्हें ग्राम प्रधान की कुर्सी तक पहुंचा दिया। गांव के विकास के सपने बुन रहीं अमिरता को अब सिर्फ शपथ ग्रहण का इंतजार है। कहा कि उनका सर्वाधिक कार्य महिला शक्ति को बढ़ावा देने वाला होगा।

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