गाजीपुर में छात्रों ने सड़क पर मिली रकम लौटाई, इनाम में कालेज प्रबंधन ने सालभर की फीस माफी की घोषणा की

अनिल और आकाश ने मां की सीख पर अमल करते हुए पूरा घटनाक्रम सोमवार को प्रधानाचार्य को बताया और उन्हें रुपये सौंप दिए। बच्चों की ईमानदारी से खुश होकर विद्यालय प्रबंधन ने उनकी सालभर की फीस माफ करने की घोषणा तो की।

Saurabh ChakravartyMon, 27 Sep 2021 09:32 PM (IST)
नौवीं कक्षा के छात्र अनिल यादव और आकाश यादव

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। स्कूल से छुट्टी के बाद नौवीं कक्षा के छात्र अनिल यादव और आकाश यादव आपस में हंसते-बतियाते घर की ओर बढ़ रहे थे। तभी रास्ते में गिरे रुपयों की गड्डी पर दोनों की निगाह गई। एक ने उठाया और गिना तो आठ हजार रुपये थे। दोनों चौंके। चारों ओर देखा तो कोई न दिखा। पहले तो समझ नहीं पाए कि अब इन रुपयों का करें क्या? फिर दोनों ने तय किया कि घर जाकर मां को बताते हैैं। मां ने संस्कार की सीख दी और दोनों को रुपये जाकर स्कूल के प्रधानाचार्य को देने को कहा। अनिल और आकाश ने मां की सीख पर अमल करते हुए पूरा घटनाक्रम सोमवार को प्रधानाचार्य को बताया और उन्हें रुपये सौंप दिए। बच्चों की ईमानदारी से खुश होकर विद्यालय प्रबंधन ने उनकी सालभर की फीस माफ करने की घोषणा तो की ही, दोनों को वार्षिकोत्सव में सम्मानित करने का भी निर्णय लिया। उनकी ईमानदारी की इलाके में चर्चा है।

माता-पिता के अच्छे संस्कार बच्चों के बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं। ऐसा ही हुआ सिखड़ी के पं. मदन मोहन मालवीय इंटर कालेज के कक्षा नौ में पढऩे वाले सिहाबारी गांव के दोनों छात्रों के साथ। खास बात यह कि अनिल और आकाश दोनों अलग-अलग परिवारों से हैैं। अनिल के पिता परमहंस यादव और आकाश के पिता ऋषिदेव यादव किसान हैैं। अनिल और आकाश को रुपये शनिवार को गिरे मिले थे।

जिसके रुपये थे उस तक पहुंचे

शनिवार को जो रुपये दोनों छात्रों को गिरे मिले थे, वह दुल्लहपुर के बखरा गांव निवासी एक शख्स के थे। हुआ यूं कि उस व्यक्ति ने कुर्ते में रुपये रखे थे जो किसी तरह गिर गए। उसे थोड़ी देर बाद अहसास हुआ तो वह परेशान हो उठा। उसी दौरान स्कूल की छुट्टी हुई थी तो उसने प्रधानाचार्य पारसनाथ राय से मिलकर अनुरोध किया कि अगर किसी छात्र को रुपये मिले हों तो मदद करें। इसी बीच सोमवार को छात्रों ने जब प्रधानाचार्य को रुपये सौंपे तो उन्होंने उस व्यक्ति को बुलाकर दोनों छात्रों की ईमानदारी बताते हुए उसके रुपये लौटौ दिए।

इनाम क्यों... यह तो हमारा कर्तव्य था

जिस व्यक्ति के आठ हजार रुपये उसे वापस मिले, उसने आकाश और अनिल की ईमानदारी से खुश होकर कुछ रकम उन्हें इनाम के तौर पर देनी चाही तो दोनों ने इन्कार करते हुए कहा- 'इनाम किस बात का... यह तो हमारा कर्तव्य था।

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