कोरोना वायरस संक्रमण के कारण एक महीने के अंदर पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के 30 रेलकर्मियों ने गंवाई जान

पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में गत आठ अप्रैल से लेकर दो मई तक 30 कर्मचारियों की मौत हो गई।

कोरोना वायरस का कहर सबसे ज्यादा रेलकर्मियों पर बरपा। अकेले पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में गत आठ अप्रैल से लेकर दो मई तक 30 कर्मचारियों की मौत हो गई। सिर्फ एक मंडल में कर्मचारियों की मौत का यह आंकड़ा पूरे भारतीय रेलवे में काफी ज्यादा है।

Saurabh ChakravartyMon, 10 May 2021 12:53 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना वायरस का कहर सबसे ज्यादा रेलकर्मियों पर बरपा। अकेले पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में गत आठ अप्रैल से लेकर दो मई तक 30 कर्मचारियों की मौत हो गई। सिर्फ एक मंडल में कर्मचारियों की मौत का यह आंकड़ा पूरे भारतीय रेलवे में काफी ज्यादा है। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों की तन्द्रा नहीं खुली। बिना पब्लिक डीलिंग वाले दफ्तर भी खुले हुए हैं। हालांकि 40 फीसदी ड्यूटी रोस्टर के अनुसार रेलकर्मियों से काम लिया जा रहा। फिर भी वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के आगे यह सहूलियत भी नाकाफी है।

पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में मृतकों के आंकड़े पर गौर करें तो आठ अप्रैल से लेकर दो मई तक विभिन्न स्टेशनों पर कार्यरत 30 कर्मचारियों की मौत हो गई। इनमें रेलवे गार्ड, ट्रैक मेंटर, डीजल खलासी, डीजल मैकेनिक, चौकीदार, तकनीशियन,ईएसएम, गेटमैन, सफाई वाला, कांटावाला, स्टेशन अधीक्षक व स्टेशन मास्टर शामिल है।

गीतकार जितेंद्रनाथ सिंह जीत का कोरोना से निधन
भोजपुरी लोकगीतों के ख्यात रचनाकार जितेंद्रनाथ सिंह जीत का रविवार को कोरोना से निधन हो गया। वह 76 साल के थे। सांस की तकलीफ होने पर उन्हें बीएचयू में भर्ती कराया गया था जहां उन्होंने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। अंत्येषिट हरिश्चंद्र घाट पर की गई। मुखाग्नि पुत्र शमशेर सिंह ने दी। दो हफ्ते पहले कोविड संक्रमण से उनकी पत्नी लीलावती सिंह का भी निधन हो गया था। गाजीपुर के पातेपुर निवासी जितेंद्र नाथ सिंह जीत ने भारतीय सेना में सिग्नल ऑपरेटर के पद पर रहते हुए 1965 और 71 की लड़ाई में हिस्सा लिया था। वहां से सेवानिवृति होने के बाद आकाशवाणी वाराणसी में सुरक्षा अधिकारी के पद पर तैनात हुए। वे आकाशवाणी के बी हाई ग्रेड के कलाकार और गीतकार थे। उनके गीतों को मनोज तिवारी, महुआ बनर्जी, रेवती साकलकर, अमलेश शुक्ला जैसे कलाकारों ने स्वर दिया है। बाड़ी शेर पर सवार..., सबही के असरा तोहार पार मोरी..., बबुनी बारह बजे बुलवलू..., अबहीने से खाए लगलु पान... , उड़ती चिरैया से बोले कौशल्या... , आंख में बा कजरा जुड़ा में बा गजरा.. आदि गीत चर्चित हैं। उन्होंने जइब देवी के दुअरिया, गीत गुंजन, बाजे मेरी वीणा के तार, चटक चांदनी, लोक संगीत सागर आदि पांच पुस्तके लिखी हैं।

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