आक्सीजन का 30 हजार दो नहीं तो मरीज को कर देंगे बाहर, वाराणसी पुलिस जुटी कार्रवाई में तो डाक्टर लगे गिड़गिड़ाने

आक्सीजन के तीस हजार रुपये मांगने का मामला संज्ञान में आते ही फुलपूर थाना एसएचओ तुरंत कार्रवाई में जुट गए।

डाक्‍टर की ओर से आक्सीजन के तीस हजार रुपये मांगने का मामला संज्ञान में आते ही फुलपूर थाना एसएचओ तुरंत कार्रवाई में जुट गए। कुछ ही देर में फोन कर डाक्‍टर ने पुलिस से माफी मांगी और आग कभी शिकायत का मौका नहीं देने की बात की।

Saurabh ChakravartySun, 09 May 2021 08:20 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। आक्सीजन के तीस हजार रुपये दो नहीं तो मरीज कर दूंगा बाहर। यह जिले के एक निजी अस्पताल का मामला है जहां मरीज भर्ती है। इसकी शिकायत एक व्यक्ति ने राष्ट्रीय हिंदू दल के अध्यक्ष रोशन पांडेय को फोन पर देते हुए मदद की गुहार लगाई। बताया कि फूलपूर थाना क्षेत्र के जीवन ज्योति अस्पताल के डाक्टर दिनेश मिश्रा एक दिन का आक्सीजन बेड का चार्ज 30 हजार रुपये मांग रहे हैं और डाक्टर साहब बोल रहे हैं मेरी मजबूरी है। इसके बाद रोशन पांडेय ने जीवन ज्योति अस्पताल के डॉक्टर दिनेश मिश्रा से फोन पर बात की तो डॉक्टर ने कहा हां मैं लूंगा।

गरीब है तो इसे कबीरचौरा में भेज देता हूं। मैं अपने पास अब किसी कीमत पर नहीं रखूंगा। जब रोशन पांडेय ने कहा गरीब मरीज है मर जाएगा तो डॉक्टर ने कहा मैं इसे कबीर चौरा भेज देता हूं। अब नहीं रखूंगा जो करना है करो रिकार्ड कर लो और रिकार्डिंग लेकर नाचते रहो डीएम को सुना देना। इसके बाद रोशन पांडेय ने दोनों रिकॉर्डिंग को जिलाधिकारी की प्रवर्तन टीम को भेजकर शिकायत और कार्रवाई की मांग की। मामला संज्ञान में आते ही फुलपूर थाना के एसएचओ तुरंत कार्रवाई में जुट गए। कार्रवाई होते देख डॉक्टर ने रोशन पांडेय को फोन कर माफी मांगी और कहा कि मेरे पिताजी का एक दिन पूर्व निधन हो गया जिसके बाद मै डिप्रेशन में आकर ऐसा बोल गया। कोई कार्रवाई मेरे ऊपर ना करें, दोबारा ऐसा कोई शिकायत का मौका नहीं दूंगा। रोशन ने कहा पहले आप मरीज का इलाज करें।

महमना और कोरोना के नाम पर धन उगाही तो नहीं हो रही

बीएचयू महामना परिवार के नाम से एक एप बनाकर हजारों को ई-आई कार्ड जारी किया जा रहा है। वहीं विगत दिनों इस नाम से फेसबुक पर कई पेज बनाए गए और डिएक्टिवेट कर दोबारा बनाए गए। इन पेजों पर कोरोनाकाल में मदद के अनुरोध पर बीएचयू के कई अलुमुनाई और छात्र काफी राशियां भी दान कर चुके हैं। फेसबुक पर इस समय चार-पांच अकाउंट इस नाम से चल रहे हैं, जिसके विरोध में बीएचयू के कई छात्रों इंटरनेट मीडिया पर आवाज उठाया है।

कहा कि आपदा को इस तरह से अवसर बनाने वाले लोगों से सावधान रहें। वहीं बीएचयू के जनसंपर्क विभाग ने ट्वीट कर बताया कि इस पेज को किसी भी प्रकार से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही इन पेजों का बीएचयू के साथ कोई संबंध नहीं है। बीएचयू के छात्रों ने कहा कि कहीं कोरोना के नाम पर कुछ लोग धन उगाही का कार्य तो नहीं कर रहे हैं। जब बीएचयू के पास अपनी अलुमुनाई सेल है तब इस पेज के जरिए कहीं महामना के नाम पर फर्जीवाड़ा तो नहीं हाे रहा।

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