बलिया में टोंस नदी में उफान से बही सड़क, सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न होने से बढ़ी समस्या

अनवरत हो रही मूसलधार बारिश से नदियां उफान पर हैं।
Publish Date:Mon, 28 Sep 2020 06:10 AM (IST) Author: Abhishek Sharma

बलिया, जेएनएन। अनवरत हो रही मूसलधार बारिश से नदियां उफान पर हैं। इससे तटवर्ती इलाकों में संकट गहरा गया है। सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न होने से अन्नदाता मुश्किल में हैं। प्रशासनिक स्तर पर कोई मदद न मिलने से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 

रसड़ा प्रतिनिधि के अनुसार मूसलधार बारिश से जहां क्षेत्र के कई गांवों में बरसाती पानी घुस गया है वहीं टोंस नदी के जलस्तर में निरंतर हो रही वृद्धि से तटवर्ती इलाकों की स्थिति भयावह होती जा रही है। शनिवार की देर रात अतरसुआं-चिरकिटिहां के बीच सरंगी नाले पर बनी 50 मीटर लंबी सड़क बह गई। इससे आवागमन पूर्ण रूप से बाधित हो गया है। वहीं सड़क बहने की वजह से नदी के किनारे स्थित सैकड़ों बीघा धान समेत अन्य खरीफ की फसलें पानी में  डूब चुकी हैं। इससे सब्जी की खेती करने वाले किसानों को खासा नुकसान हुआ है। इलाके के प्रधानपुर, मिर्जापुर जेवैनिया, डुमरिया, अरसुआं, लखुआं, धनईपुर, कोप, सिलकहर, नगपुरा, बेसवान व टीकादेवरी गांवों की स्थिति कुछ ज्यादे ही खराब है।

खरीफ की फसल जलमग्न

नारायणगढ़ गांव के पास रिंग बंधे पर लगा रेगुलेटर न खोलने से सैकड़ो एकड़ खरीफ की फसल जलमग्न हो गई है। इससे क्षेत्रीय किसानों का काफी नुकसान हो रहा है। क्षेत्र के श्रीकांतपुर व श्रीनगर के किसानों ने जिलाधिकारी व एसडीएम  से उक्त रेगुलेटर को खोलवाने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि रेगुलेटर बंद होने के कारण तरसोत व बारिस के पानी से श्रीकांतपुर, नारायणगढ़ व श्रीनगर गांव के सैकड़ो एकड़ खेत पानी में डूब गया है। इससे चलते दर्जनों किसान के बगीचों में लगे पौधे बर्बाद हो रहे हैं वहीं खरीद की फसल भी पूरी तरह नष्ट होने के कागार पर है। बताया कि जब तक रेगुलेटर नहीं खोला जाएगा तब तक यहां के लोंगों को जलजमाव से मुक्ति नहीं मिलेगी। इसके चलते रबी की बुआई भी पिछडऩे का डर है। गांव के अनिल सिंह, मंगल सिंह, वीरबहादुर सिंह, मुन्ना सिंह सहित दर्जनों किसानों ने जिला प्रशासन के उपेक्षात्मक रवैये पर क्षोभ प्रकट करते हुए तत्काल रेगुलेटर खोलवाने की मांग की।

उफनते नाले से बर्बाद हो रही धान की फसल       

इंदरपुर पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश  के बाद इलाके का लकड़ा नाला व आंवला ड्रेन उफान पर है। इसके चलते इनके किनारे के खेतों में काफी पानी लग गया है। खास कर क्षेत्र के रघूनाथपुर, ङ्क्षचतामणिपुर, बसनही, पान्डेयपुर, चौबेपुर, रतसी, ताखा, डांडेपुर समेत दो दर्जन गांव के किसानों की धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। इससे किसान खासा ङ्क्षचतित हैं।

दो दर्जन से अधिक गांवों में घुसा पानी

भारी बारिश से तहसील परिसर समेत कई सरकारी कार्यालयों में पानी गया है। जलनिकासी का पुख्ता प्रबंध न होने से यह समस्या और भी जटिल हो गई है। वहीं तहसील गेट के पास नाला निर्माण के लिए खोदा गया गड्ढा कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। हालांकि शनिवार को तहसीलदार जितेंद्र सिंह द्वारा पानी निकलवाने की कोशिश की किंतु प्रयास बेअसर ही रहा। दूसरी ओर क्षेत्र के करीब 25 गांवों का अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया है। इसमें कुण्डैल रेल क्राङ्क्षसग नई कालोनी, कुण्डैल, शाह कुण्डैल, बांसपार बहोरवां, अतरौल, चंदायरकलां, टंगुनिया, बिठुआ, सरयां, उधरन, जमुआंव, मालीपुर, हल्दीरामपुर बहाटपुर, महेंदुआ व चैनपुर की हालत तो कुछ ज्यादा ही खराब है।

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