कोरोना संक्रमण कम होने के बाद जगी उम्मीद, पांच माह बाद खुलेगा ताला, होगी स्कूलों में पढ़ाई

सूबे में अब कोरोना का संक्रमण कम हुआ है। कई जिले संक्रमण में पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। ऐसे में अब स्कूल-कालेज खुलने की उम्मीद जग गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बेसिक से लगायत उच्च शिक्षण संस्थान जल्द खुलने के संकेत दे चुके हैं।

Abhishek SharmaSun, 01 Aug 2021 11:32 AM (IST)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बेसिक से लगायत उच्च शिक्षण संस्थान जल्द खुलने के संकेत दे चुके हैं।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सूबे में अब कोरोना का संक्रमण कम हुआ है। कई जिले संक्रमण में पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। ऐसे में अब स्कूल-कालेज खुलने की उम्मीद जग गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बेसिक से लगायत उच्च शिक्षण संस्थान जल्द खुलने के संकेत दे चुके हैं। ऐसे में पांच माह बाद शैक्षणिक संस्थानों के क्लास रूमाें का ताला खुलने व स्कूलों में पठन-पाठन की संभावना जग गई है।

काेरोना महामारी के प्रकोप के चलते प्राथमिक से लगायत उच्च शैक्षणिक संस्थान मार्च से ही बंद चल रहे हैं। पहली अप्रैल से नए सत्र की पढ़ाई भी कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गई। हालांकि छात्रहित को देखते हुए शैक्षणिक संस्थानों ने ग्रीष्मावकाश में भी आनलाइन क्लास चलाया। स्कूल-कालेजों में आनलाइन क्लास अब भी जारी है। वहीं संसाधन के अभाव में प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के करीब 40 फीसद बच्चे अब भी आनलाइन क्लास से बाहर चल रहे हैं। यही नहीं माध्यमिक विद्यालयों के विभिन्न कक्षाओं में अब तक दाखिला पूर्ण नहीं हो सका है। पिछली कक्षाओं में अध्ययनरत करीब 30 फीसद बच्चे अब भी अगली दाखिला नहीं ले सके हैं। जबकि कोरोना महामारी में इस बार सभी बच्चों को बगैर परीक्षा के अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया था। बच्चों का दाखिला कम होने से माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापक भी चिंतित हैं।

अध्यापक ऐसे बच्चों व उनके अभिभावकों से फोन व अन्य माध्यमों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। आर्य महिला इंटर कालेज की प्रधानाचार्य डा. प्रतिभा यादव ने बताया कि कक्षा-छह से 12 तक में करीब 2500 छात्राएं पंजीकृत हैं। वहीं अब तक करीब 1700 छात्राओं ने ही अगली कक्षाओं में दाखिला लिया है। अगली कक्षा में पंजीकरण न कराने के कारण इन छात्राओं को अब तक आनलाइन क्लास से भी नहीं जोड़ा जा सका है। जबकि शासन के निर्देश पर अब विद्यालय खुल रहे हैं लेकिन विद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन न होने के कारण छात्राएं विद्यालय नहीं आ रही हैं।

ऐसे में यदि विद्यालय खुलता है तो दाखिले की प्रक्रिया दस दिनों के भीतर पूर्ण होने की संभावना है। उधर निजी विद्यालय प्रबंधन भी शासन-प्रशासन पर शैक्षणिक संस्थाएं खोलने का लगातार अनुरोध कर रहा है। निजी संस्थाओं का कहना है कि जब बाजार-हाट अब पूरी क्षमता के साथ खुल रहा है तो विद्यालय क्यों नहीं। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। वहीं मुख्यमंत्री के संकेत के बाद अब विद्यालयों ने खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। विद्यालयों में साफ-सफाई शुरू कर दिया है।

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