बीएचयू में तीन महीने से बंद है एचएलएबी 27 टेस्ट, निजी जांच केंद्रों पर कई गुना महंगी है जांच

पीसीआर (पालीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) है। एचएलए (ह्यूमन लाइकोसाइट एंटीजन) एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो शरीर की सभी न्यूक्लियस युक्त कोशिकाओं में ही पाया जाता है। यह सबसे अधिक श्वेत रक्त कणिका में पाया जाता है।

Abhishek SharmaMon, 22 Nov 2021 06:00 AM (IST)
डा. ऊषा सिंह पैथालाजी में तीन महीने से मरीजों का एचएलएबी 27 टेस्ट नहीं हो रहा है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। काशी हिंदू विश्ववविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में मालीक्यूलर बायोलाजी से संबंधित डा. ऊषा सिंह पैथालाजी में तीन महीने से मरीजों का एचएलएबी 27 टेस्ट नहीं हो रहा है। यह परीक्षण करने वाली थर्मो साइकिलर मशीन सितंबर के अंतिम सप्ताह से खराब पड़ी है। इसके चलते प्रतिदिन दर्जनों मरीज वापस जाने के लिए विवश हैं। उन्हें यह परीक्षण बाहर निजी जांच केंद्रों पर दो से ढाई गुना अधिक महंगी दर पर कराना पड़ रहा है। इसके चलते मरीजों व उनके परिजनों को आर्थिक समस्या तो उठानी ही पड़ रही है, जांच के लिए इधर से उधर भटकना पड़ रहा है।

क्या है एचएलएबी-27 टेस्ट : यह एक प्रकार का पीसीआर (पालीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) है। एचएलए (ह्यूमन लाइकोसाइट एंटीजन) एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो शरीर की सभी न्यूक्लियस युक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। यह सबसे अधिक श्वेत रक्त कणिकाओं में पाया जाता है। इस एंटीजन के 27 से अधिक प्रकार पाए गए हैं। इन 27 प्रकारों के भी कई उप प्रकार हैं जिन्हें एबीसीडी.. में वर्गीकृत किया गया है। एचएलए प्रोटीन की मदद से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की कोशिकाओं और बाहर की एंटीजन वाली कोशिकाओं के बारे में अंतर पता कर पाती है। इसमें शरीर की कोशिकाओं को सेल्फ और बाहर की कोशिकाओं नान- सेल्फ कोशिकाएं कहा जाता है।

क्यों कराया जाता है यह टेस्ट : चिकित्सा विज्ञान संस्थान बीएचयू के प्रो. डा. अनूप सिंह बताते हैं कि यह टेस्ट एकिलाजिंग स्पांडिलाइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस, सोरायटिक आर्थराइटिस, ग्रेव्ज डिजीज और रिटर्स सिंड्रोम आदि का पता लगाने के लिए किया जाता है। इससे बीमारियों की पहचान सुनिश्चित होती है। जरूरी नहीं कि इस प्रोटीन की उपस्थिति से कोई बीमारी होती ही हो।

कई बार आ चुके हैं अभियंता, उम्मीद है कि जल्दी ठीक हो जाएगी : ‘एचएलएबी 27 टेस्ट करने वाली थर्मो साइकिलर मशीन काफी पुरानी हो चुकी है। अब यह खराब हो चुकी है, इसे ठीक करने के लिए तीन बार कंपनी के अभियंता आ चुके हैं। ठीक न हो सकी है। एक दो दिन में पुन: आने वाले हैं। उम्मीद है कि ठीक हो जाएगी। मशीन यदि ठीक न हो सकी तो फिर संस्थान को नई मशीन मंगाने के लिए लिखा जाएगा।’ -डा. विजय तिलक, प्रभारी प्रोफेसर माइक्रोबायोलाजी विभाग। 

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