वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में 27 जुलाई को होगी निगरानी याचिका पर सुनवाई, मस्जिद के पक्षकारों ने दी है चुनौती

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बोर्ड आफ वक्फ और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत ने 27 जुलाई की तिथि निर्धारित कर रखी है।

Saurabh ChakravartyFri, 23 Jul 2021 09:47 PM (IST)
याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत ने 27 जुलाई की तिथि निर्धारित कर रखी है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वरनाथ, पंडित शोभनाथ व्यास, डा. रामरंग शर्मा तथा अन्य पक्षकारों ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण तथा हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने आदि को लेकर मुकदमा दायर किया था। इस मुकदमे की सुनवाई सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में चल रही है।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने विवादित स्थल का धार्मिक स्थिति के निर्धारण के लिए 10 दिसंबर 2019 को अयोध्या रामजन्म भूमि के भांति पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा राडार तकनीक से भौतिक व पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अदालत से अपील की। वादी तथा प्रतिवादी पक्ष की कई बार हुई बहस को सुनने और नजीर के अवलोकन के बाद सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत ने आठ अप्रैल 2021 को वाद मित्र की अपील को मंजूर कर ली। केंद्र व राज्य सरकार से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश के खिलाफ उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बोर्ड आफ वक्फ और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से जिला जज की अदालत में निगरानी याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत ने 27 जुलाई की तिथि निर्धारित कर रखी है। याचिका में कहा गया है कि ज्ञानवापी मामले में सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) को आदेश पारित करने का क्षेत्राधिकार नहीं था।

निगरानी याचिका पर जिला जज की अदालत में सुनवाई लंबित

ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े मुकदमे की सुनवाई करने के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत के क्षेत्राधिकार को लेकर भी दाखिल निगरानी याचिका पर जिला जज की अदालत में सुनवाई लंबित है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तथा अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) न्यायालय के इस मुकदमे की सुनवाई करने के क्षेत्राधिकार को चुनौती दी गई थी। दलील थी कि वक्फ न्यायाधिकरण के गठन के बाद उक्त मामले की सुनवाई करने का सिविल जज अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं है। इस पर वादी पक्ष द्वारा आपत्ति की गई थी कि उक्त विवादित परिसर स्वयंभू ज्योतिॄलग भगवान विश्वेश्वरनाथ मंदिर का अंश है।

सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और नजीर के अवलोकन के बाद 25 फरवरी 2020 को सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजूमन इंतजामिया मसाजिद की चुनौती को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मुसलमानों के मध्य विवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार वक्फ न्यायाधिकरण को है जबकि गैर मुस्लिम के स्वत्व के सुनवाई का क्षेत्राधिकार सिविल अदालत को है। उधर, ज्ञानवापी मस्जिद मामले के मुकदमे की पोषणीयता को लेकर हाईकोर्ट में भी सुनवाई लंबित है। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।

 

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