वाराणसी में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्यवाही

घातक बायोमेडिकल वेस्ट (कचरा) के खतरों के प्रति अस्पतालों को सचेत करते हुए सीएमओ ने कहा कि इसके प्रति सरकार अत्यंत गंभीर है। इसके लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के तहत कई नियम-अधिनियम बनाए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (ग्रीन ट्रिव्यूनल) का भी गठन किया गया है।

Abhishek SharmaSat, 05 Jun 2021 10:54 PM (IST)
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के तहत कई नियम-अधिनियम बनाए गए हैं।

वाराणसी, जेएनएन। जनपद में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी अस्पतालों में संक्रमण से बचाव के मानकों का पूरी तरह पालन करना होगा। ताकि अस्पतालों से निकलने वाले बायो-मेडिकल कचरे से मानव जीवन के साथ ही पर्यावरण को भी कोई नुकसान न पहुंचे। यह बातें विश्व पर्यावरण दिवस पर सीएमओ डा. वीबी सिंह ने कही।

घातक बायोमेडिकल वेस्ट (कचरा) के खतरों के प्रति अस्पतालों को सचेत करते हुए सीएमओ ने कहा कि इसके प्रति सरकार अत्यंत गंभीर है। इसके लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के तहत कई नियम-अधिनियम बनाए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (ग्रीन ट्रिव्यूनल) का भी गठन किया गया है। इनके नियमों, अधिनियमों तथा दिशा-निर्देशों के अनुरूप जनपद के सभी निजी एवं सरकारी अस्पतालों का समय-समय पर निरीक्षण कराया जा रहा है और कमियां पाए जाने पर उन्हें नोटिस भी दी जा रही है। डा. सिंह ने कहा कि स्वस्थ, सुरक्षित और आनंददायक जीवन के लिए पर्यावरण की रक्षा करना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। कई गंभीर बीमारियां संक्रमण के द्वारा ही फैलती हैं। यदि हमारा पर्यावरण स्वच्छ है तो अनेक गंभीर बीमारियों के साथ ही वर्तमान में आपदा बने कोविड-19 संक्रमण के खतरे को भी कम किया जा सकता है।

क्या कहता है नियम-अधिनयम

- भारत सरकार के जैव चिकित्सा अपशिष्ट अधिनियम-2016 एवं जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम 2018 के तहत समस्त गैर सरकारी एवं सरकारी चिकित्सा इकाईयों को उनके यहां से निकलने वाले बायो मेडिकल अपशिष्टों का प्रभावी रूप से प्रबंधन करना है। ऐसा न करने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण एवं केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार आर्थिक दंड का प्रावधान है। सभी चिकित्सालयों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति, सीबीडब्ल्यूटीएफ के साथ अनुबंध, बायोमेडिकल वेस्ट का समुचित पृथक्कीकरण, अलग-अलग रंग यथा लाल, पीला, नीला रंग के डस्टबिन नॉन क्लोरीनेटेड पोलिथीन सहित रखना, बायो वेस्ट की बार कोडिंग, हब कटर का इस्तेमाल, मानक के अनुरूप बायो मेडिकल वेस्ट हाउस का निर्माण तथा बायो मेडिकल वेस्ट संग्रह के स्थान पर आईईसी मटैरियल का प्रदर्शन करना अनिवार्य है।

सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें 

- डा. सिंह ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से अन्य गंभीर बीमारियों के अलावा कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसलिए अपनी आदतों में सुधार लाते हुए सभी को इसका पूर्णतया पालन करना चाहिए और दूसरों को जागरुक करना चाहिए।

वेक्टर जनित बीमारियों से करें बचाव

- आने वाले मौसम में वेक्टर जनित बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, मस्तिष्क ज्वर इत्यादि गंभीर बीमारियों की भी आशंका बढ़ जाती है। यदि हम अपने वातावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूकता दिखाएं और वेक्टर जनित रोगों से बचने के लिए बताए गए उपायों पर अमल करें तो कई गंभीर बीमारियों के खतरे से बचा जा सकता है। उन्होने कहा यही समय है कि हम अपने घर तथा उसके आस-पास के वातावरण की स्वच्छता एवं सुरक्षा के लिए आगे आयें।

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