गुरु तेगबहादुर ने मीरजापुर के भुईली गांव में रूककर दिया था उपदेश, अनुयायियों ने बनाया गुरुद्वारा

सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर साहब ने करीब 350 वर्ष पूर्व भुईली गांव में रूककर यहां अपनी अमृतवाणी से ज्ञान का प्रकाश फैलाया था। उन्होंने जहां ज्ञान का उपदेश दिया था उनके जाने के बाद वहां अनुयायियों ने गुरुद्वारे का निर्माण करा दिया।

Saurabh ChakravartyTue, 23 Nov 2021 05:15 PM (IST)
गुरु तेगबहादुर ने मीरजापुर के भुईली गांव में रूककर दिया था उपदेश

जागरण संवाददाता, मीरजापुर। महाभारत कालीन राजा भूरिश्रवा की राजधानी के रूप में विख्यात भुईली गांव लगभग सभी संप्रदायों के लिए विशेष महत्व का स्थान रहा है। भुईली की उत्तरी पहाड़ी पर एक तरफ जहां हिंदू मंदिरों के साक्ष्य मिले हैं वहीं दूसरी तरफ अफगान शासक शेरशाह सूरी ने पहाड़ी पर डाक चौकी की स्थापना कराया। मुगलों के जमाने में मकदूम शाह बाबा का मजार भी बनाया गया। गंगा-जमुनी तहजीब में चार चांद तब लगा जब सिक्खों के नौवें धर्म गुरु ने इस गांव की माटी को अपने चरणरजों से पाक बनाया।

सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर साहब ने करीब 350 वर्ष पूर्व भुईली गांव में रूककर यहां अपनी अमृतवाणी से ज्ञान का प्रकाश फैलाया था। उन्होंने जहां ज्ञान का उपदेश दिया था, उनके जाने के बाद वहां अनुयायियों ने गुरुद्वारे का निर्माण करा दिया। उपदेश स्थल पर उनकी तस्वीर रख अनुयायी आज भी उन्हें पूजते हैं। नौवें गुरु के भुईली गांव आने के बारे में निहाल सिंह बाबा के पत्थर की शिला पर लिखे गए शब्द आज भी गुरुद्वारे के दीवार पर लगे हैं, जो उनके आने की बात को पुख्ता करते हैं। शिला पर प्रयागराज संगम से स्नान कर पटिहटा, अहरौरा से होते हुए भुईली आने एवं नीचीबाग वाराणसी जाने के बारे में लिखा है। गुरूद्वारे के जीर्णोद्धार के समय सन् 2000 में बाहरी दीवार पर लगे नौवें गुरु के आने वाले शिलालेख को गुरूद्वारे के भीतर दीवार में लगाकर सुरक्षित कर दिया गया। गुरूद्वारे का पुराना भवन आज भी विद्यमान है। इसमें सेवादार रहते हैं। सुबह-शाम भजन व पूजन होता है। गुरूद्वारे में प्राचीन बाउली, लंगर हाल एवं सत्तर फीट ऊंचा निशान साहेब मौजूद है। सेवादार सुमेर सिंह ने बताया कि प्रकाश उत्सव मार्च महीने में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। तीन दिन के अखंड पाठ के बाद भजन एवं बंदगी के बाद लंगर आयोजित होता है। सेवादार गरदीप सिंह ने बताया कि गुरूद्वारे का संचालन प्रबंध कमेटी लक्सा गुरूबाग वाराणसी की ओर से किया जाता है।

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