गोवा क्रांति दिवस : डा. राममनोहर लोहिया ने बनारस से दिया गोवा चलो का नारा, बांसफाटक मोहल्ले में जमाया था डेरा

अगस्त क्रांति के दौरान हुई गिरफ्तारी के बाद 1946 में लाहौर जेल से रिहा हुए क्रांति पुरुष डा. राममनोहर लोहिया का पहला पड़ाव दिल्ली में था। ब्रिटिश सरकार से समझौता हो चुका था बस चंद कदम ही दूर रह गयी थी आजादी।

Saurabh ChakravartyFri, 18 Jun 2021 09:30 AM (IST)
गोवा के ऐतिहासिक म्युनिसिपल मैदान में स्थापित डा. राममनोहर लोहिया की आदमकद प्रतिमा।

वाराणसी [कुमार अजय]। अगस्त क्रांति के दौरान हुई गिरफ्तारी के बाद 1946 में लाहौर जेल से रिहा हुए क्रांति पुरुष डा. राममनोहर लोहिया का पहला पड़ाव दिल्ली में था। ब्रिटिश सरकार से समझौता हो चुका था बस चंद कदम ही दूर रह गयी थी आजादी। वे इसके पहले ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आशीर्वाद लेकर मुंबई (बम्बई) जा पहुंचे। वहां 8 जून 1946 बाकायदा पत्रकार वार्ता की।

18 जून 1946 को गोवा के म्युनिसिपल मैदान में स्वातंत्र्य सभा की मुनादी कर दी। आगे चलकर गोवा आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने का खाका लोहिया ने बनारस में बुना और यहीं से बुलंद किया गोवा चलो का नारा। इधर मुंबई में लोहिया के ऐलान की खबर गोवा पहुंची तो तत्कालीन पुर्तगाली शासन के होश फाख्ता हो गए। पार गमन की बंदिशों से मुक्त होने के बाद भी गोवा की सीमाएं सील कर दी गईं। 18 जून को लोहिया गोवा में कदम न रख पाएं। इस गरज से चप्पे-चप्पे पर बैठा दिए गए पहरे। पर सरकार को भला क्या पता कि बागी तो वेश बदलकर चार दिन पहले ही गोवा पहुंच चुका है। 18 जून 1946 को गोवा के कोने-कोने से उठे जनज्वार से मैदान पट गया।

मंच पर मौजूद लोहिया को देख सरकार सकते में थी और प्रशासन स्तब्ध। जब उनकी मूच्र्छा टूटी तो वहां तैनात पुलिस अधिकारी मंच पर जा चढ़े और डा. लोहिया की कनपटी पर पिस्तौल सटा दी। हठीले लोहिया ने कहा, चलाओ गोली-गोवा धधक उठेगा। इतने पर प्रशासन की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी। लोहिया का भाषण हुआ, इस चेतावनी के साथ कि गोवा मुक्त नहीं हुआ तो 18 सितंबर को फिर आऊंगा। समाजवादी विचारक विजय नारायण बताते हैं कि वायदे के मुताबिक 18 सितंबर 1946 को लोहिया फिर गोवा पहुंचे। भाषण के दौरान गिरफ्तारी हुई। 15 दिन अगोडा फोर्ट की जेल में सजा भुगतने के बाद लोहिया आजाद हुए मगर तब तक गोवा में मुक्ति संग्राम की मशालें धधक उठी थीं।

बांसफाटक स्थित मौसी के घर पर जमाया डेरा : विजय नारायण के अनुसार गोवा की दूसरे बगावती सफर के बाद लोहिया बनारस आए। अपनी प्रतिपालक मौसी के घर बांसफाटक पर डेरा जमाया। समाजवादियों को जुटाया और आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्वरूप देते हुए गोवा चलो का नारा गुंजाया। इसके बाद तो गोवा की आजादी तक देशभर से समाजवादी युवाओं के जत्थे अनवरत गोवा जाते रहे और क्रांति की अलख जगाते रहे।

मौसी के आंचल की छांव में ही पले लोहिया : वरिष्ठ समाजवादी नेता राधेश्याम श्याम सिंह बताते हैं कि बचपन में ही मां की ममता की छांव से वंचित राममनोहर लोहिया का पालन पोषण बनारस वाली मौसी के यहां ही हुआ। शुरुआती शिक्षा भी उन्होंने यहीं सेंट्रल हिन्दू स्कूल से पूरी की।

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