सराफा बाजार को रफ्तार का उपहार, वाराणसी में कोरोना काल में भी नहीं थमा आभूषणों की गढ़ाई और ढलाई का काम

कारीगर दिन-रात एक कर गढ़ाई और ढलाई के काम में लगे हैं।

अब लग्न के सभी आर्डरों की डिलिवरी का भार अक्षय तृतीया पर आ पड़ा है। पर्व विशेष को देखते हुए सभी को उसी दिन गहनों की डिलीवरी चाहिए। ऐसे में कारीगर दिन-रात एक कर गढ़ाई और ढलाई के काम में लगे हैं। कारखानों में दिन-रात भठ्ठी गर्म है।

Saurabh ChakravartyWed, 12 May 2021 04:20 PM (IST)

वाराणसी [सौरभ चंद्र पांडेय]। महामारी के दौर में भले ही सराफा मंडी बंद है, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियां थमी नहीं हैं। अब लग्न के सभी आर्डरों की डिलिवरी का भार अक्षय तृतीया पर आ पड़ा है। पर्व विशेष को देखते हुए सभी को उसी दिन गहनों की डिलीवरी चाहिए। ऐसे में कारीगर दिन-रात एक कर गढ़ाई और ढलाई के काम में लगे हैं। कारखानों में दिन-रात भठ्ठी गर्म है। सोने की गलाई और ढलाई लगातार जारी है। अब बारी है नए कलेक्शन को बाजार में उतारने की। शासन के निर्देश पर भले ही शो-रूमों के शटर नहीं उठेंगे लेकिन करोड़ों का सौदा होना तय है। टोले-मोहल्ले के छोटे दुकानदार लगातार कारीगरों के संपर्क में हैं। वह किसी भी तरह अपने ग्राहकों को अक्षय तृतीया पर आभूषणों की डिलीवरी देकर बाजार को भुनाना चाहते हैं। अवसर विशेष को देखते हुए कारीगरों ने उधारी बंद कर रखी है। शहर के कई कारखाने में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कारीगर अपनी कारीगरी कर रहे हैं।

बंद है उधारी, चल रही है नकदी

लॉकडाउन में सराफा मंडी बंद है, कारखाने नहीं। जहां कारीगर मेहनत से काम कर रहे हैं। उन्होंने समय को देखते हुए उधारी बंद कर रखी है। उन्हें चेक भी नहीं चाहिए, चाहिए तो बस केवल नकदी। लॉकडाउन के कारण कारीगरों ने घण्टे भर की भी उधारी बंद कर रखी है। कारीगरों का साफ कहना है कि हम कोलकाता, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र से आकर यहां कारीगरी कर रहे हैं। इस लॉकडाउन में मेहनत का ही सहारा है। तो फिर उधारी कैसी।

लग्न के बाजार का अक्षय तृतीया पर पलटवार

टोले-मोहल्ले और ग्रामीण क्षेत्र के दुकानदारों ने बताया कि जनवरी-फरवरी में जब हम लोगों ने आर्डर उठाया तब तो बाजार चल रहा था। अब अचानक से कोरोना महामारी के दूसरे लहर के कारण जब सरकार ने आंशिक लॉकडाउन लगाया तो हमसे ज्यादा ग्राहकों की धड़कने बढ़नी शुरू हो गई। उनके फोन आने शुरू हो गए कि अब हमारे टाइम पर कैसे आभूषण की डिलीवरी होगी। जो भी लग्न का आर्डर था वह अब अक्षय तृतीया में तब्दील हो गया। अब ग्राहकों का विश्वास जीतना है तो समय पर आभूषणों की डिलीवरी करनी है। दिन-रात कारखाने में शिफ्ट में काम करवा रहे हैं।

भाव बढ़ने की भी है चिंता

तीन माह पहले तक सोने का भाव 42-44 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। जब से लॉकडाउन लगा है तब से भाव में भी तेजी आ गई है। पिछले 10 दिनों में सोने के भाव में करीब दो से तीन हजार का उछाल देखा गया है। अक्षय तृतीया के बाद और भी भाव में उछाल आने के संकेत मिल रहे हैं।

कर रहे हैं होम डिलीवरी

हमें केवल आभूषण खरीदना-बेंचना नहीं है। कोरोना महामारी में अपना और अपने ग्राहकों की सुरक्षा का भी खयाल करना है। आंशिक लॉकडाउन के कारण शो-रूम बंद है तो क्या हुआ। इस महामारी में हम जो ग्राहकों का विश्वास जीतेंगे वह दीर्घकालिक होगा। इस कारण हम पांच किलोमीटर तक की दूरी तक होम डिलीवरी भी कर रहे हैं। जो आभूषण तैयार हो जा रहे हैं उनकी पैकिंग करके 14 मई की सुबह तक ग्राहकों के घर पहुंचने के लिए सम्बंधित कर्मचारी को सौंप दिया जा रहा है।

बोले कारोबारी

जिसने पहले से आर्डर किया है उसको अक्षय तृतीया पर आभूषण चाहिए। हो सकता है उसके यहां कोई समारोह आयोजित हो। ऐसे में हम उसको कैसे मना कर सकते हैं। जाहिर है हमें माल देना ही होगा और देंगे भी।

- शैलेश पटेल, बीसी ज्वैलर्स छोटा लालपुर

अपने टोले-मोहल्ले के लोगों को हम त्योहार पर कैसे मना करेंगे। अभी तक अक्षय तृतीया पर करीब 10 सोने के सिक्के का आर्डर मिला है। जिसके लिए अग्रिम राशि लोगों ने भेज दिया है। कैसे मना करें।

- सुभाष सेठ, आर्या अलंकार, बेलवाबाबा

जो 15 साल पुराने ग्राहक हैं उनके यहां शादी है, तीन माह पहले से आर्डर दे रखे हैं। 50 फीसदी राशि अग्रिम जमा है। फिर हम कैसे कह दें कि लॉकडाउन है डिलीवरी नहीं दे पाएंगे। ऐसे तो 15 साल पुराना सम्बंध खराब हो जाएगा।

- सागर अग्रवाल, सुनीता ज्वैलर्स

कुछ भी हो जिसने पैसा दिया है उसके मौके पर आभूषण तो देना होगा। तीन-चार माह से अग्रिम राशि देकर बैठे ग्राहक से हम कैसे कह दें कि लॉकडाउन है। मंदी बंद है। अग्रिम तो ग्राहक इसीलिए देता है कि पर्याप्त समय देंगे तो समय पर आभूषण की डिलीवरी मिल जाएगी।

-आकाश बर्नवाल, आकाश ज्वेलर्स

बोले कारीगर

लॉकडाउन के कारण मंडी बंद है। हमारी हुनर तो स्वर्णकारी है। परिवार है, बच्चे हैं खर्च कैसे चलेगा। लग्न का समय चल रहा है। आर्डर चंपा हुआ है। फिलहाल कारखाने में 10 में से 3 कारीगर एक शिफ्ट में काम कर रहे हैं।

-मोनू सेठ, आभूषण कारीगर।

जिस व्यापारी का आर्डर लिए हैं उसको समय पर माल देना है। यदि माल नहीं दिए तो कई साल पुराना सम्बन्धों में दरार आ जाएगा। फिर मंडी में जगहसाई भी होगी। हमारे डिलीवरी रोकने से उसका और ग्राहक का सम्बंध खराब होगा। शारीरिक दूरी का खयाल रखते हुए हम कारीगरी कर रहे हैं।

-सोनू सेठ, कारीगर।

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