गाजीपुर पुलिस को लखनऊ में नहीं मिला मुख्तार अंसारी की पत्नी का पता, हो रही पड़ताल

गाजीपुर नगर कोतवाली पुलिस को लखनऊ में मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां अंसारी अपने पते पर नहीं मिली। मंगलवार की दोपहर में गाजीपुर से रवाना हुई तीन सदस्यीय पुलिस टीम बुधवार की देर शाम तक लखनऊ में इधर-उधर खाक छानती रही।

Saurabh ChakravartyThu, 29 Jul 2021 08:10 AM (IST)
लखनऊ में मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां अंसारी अपने पते पर नहीं मिली।

गाजीपुर, जागरण संवाददाता। नगर कोतवाली पुलिस को लखनऊ में मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां अंसारी अपने पते पर नहीं मिली। मंगलवार की दोपहर में गाजीपुर से रवाना हुई तीन सदस्यीय पुलिस टीम बुधवार की देर शाम तक लखनऊ में इधर-उधर खाक छानती रही। पुलिस का कहना है कि टीम जब लखनऊ पहुंची तो कुछ लोगों से अफ्शां अंसारी के कोलकाता होने की बात सामने आई है। पता लगाया जा रहा है।

शासन के एंटी माफिया अभियान के तहत जिला प्रशासन ने मंगलवार को मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शां अंसारी के पिस्टल का लाइसेंस निलंबित कर दिया था। अफ्शां ने इस पिस्टल का लाइसेंस वर्ष 2012 में जारी कराया था। इसको जमा कराने के लिए कोतवाली पुलिस की तीन सदस्यीय टीम मंगलवार को लखनऊ जिस पते पर गई वह वहां नहीं मिली। पुलिस सूत्रों से पता लगा रही है। विदित हो कि जिला प्रशासन व पुलिस मुख्तार अंसारी, उसके स्वजन, रिश्तेदार व सहयोगियों के अब तक कुल 85 शस्त्र लाइसेंस को निलंबित कर चुकी है। इसमें 82 शस्त्र को मालखाने में जमा भी करा दिए गए हैं।

पुलिसकर्मियों की एक टीम मुख्तार की पत्नी के पिस्टल को जमा कराने के लिए लखनऊ गई है

कोतवाली के तीन पुलिसकर्मियों की एक टीम मुख्तार की पत्नी अफ्शां अंसारी के पिस्टल को जमा कराने के लिए लखनऊ गई है। मुख्तार की पत्नी का लोकेशन कोलकाता होने की सूचना मिल रही है। पुलिस पड़ताल में जुटी हुई है।

- विमल कुमार मिश्रा, शहर कोतवाल।

गिरोह के 34 लोगों पर गैंगस्टर, 122 के लाइसेंस निरस्त

गत वर्ष मई माह में अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना मुख्तार अंसारी से जुड़े लोगों के खिलाफ मऊ से कार्रवाई की शुरूआत की गई थी। तब से लेकर अब तक 10 जिलों में मुख्तार गिरोह से जुड़े 34 लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हुई। 122 लोगों के असलहों के लाइसेंस पुलिस की रिपोर्ट पर निरस्त किए गए। अब भी ऐसे लोगों को चिह्नित करने का काम जारी है। गिरोह को संरक्षण देने वाले, जमानत लेने में मदद करने वाले और काली कमाई करने वाले 200 लोगों को साक्ष्य के आधार पर जेल भेजा जा चुका है।

 

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