वाराणसी के एतिहासिक घाटों की सीढ़ियों पर लिखवाइए अपना नाम, क्यूआर-कोड से भी मिलेगी जानकारी

पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक साइनेज लगाए जा रहे हैं जिस पर घाट संबंधित पूरी जानकारी अंकित रहेगी। क्यूआर-कोड भी होगा जिसे स्कैन कर जानकारी ली जा सकेगी। घाट पुनिर्माण में जिन लोगों ने बड़ा योगदान दिया है उनका नाम भी सीढ़ियों के पत्थर पर अंकित हो रहा है।

Saurabh ChakravartyTue, 15 Jun 2021 08:50 AM (IST)
काशी की ऐतिहासिक सीढ़ियों पर दर्ज किया जा रहा है।

वाराणसी [विनोद कुमार पांडेय]। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब स्मार्ट सिटी योजना प्रारंभ की थी तो वाराणसी भी उसमें शामिल किया गया। इसके बाद तो बनारसी यही कहने लगे कि भइया अब त बनारस मुंबई हो जाई...। यहां क पुराण, अध्यात्म त छोड़ा..., इतिहास व भूगोल भी बदल जाई..., लेकिन वर्तमान में ये बातें सिर्फ अड़ियों की गपशप की बातें ही साबित हुईं। अध्यात्म, इतिहास व भूगोल को बरकारार रखते हुए विकास किया जा रहा है। इसमें पूर्व में या वर्तमान में योगदान करने वालों का भी नाम भी काशी की ऐतिहासिक सीढ़ियों पर दर्ज किया जा रहा है।

नजीर के तौर पर बनारस के टेंट व्यवसायी लल्लूजी अग्रवाल का नाम गुलेरिया घाट की सीढ़ियों पर अंकित किया गया है। घाट के पुनर्निमाण में उनके योगदान को देखते हुए स्मार्ट सिटी कंपनी ने सम्मान दिया। हालांकि यह घाट धार्मिक लिहाज से स्नान के लिए उतना प्रसिद्ध नहीं है जितना की दशाश्वमेध समेत अन्य घाट, लेकिन काशी का हर घाट किसी न किसी कारण से खास है। इस घाट पर विशाल गूलर का पेड़ था जिसके नाम से उसकी पहचान बनी। इस घाट के पक्का निर्माण की नींव टेंट व्यवसायी लल्लूजी अग्रवाल ने ही रखी जिसके बाद स्मार्ट सिटी योजना के तहत सीढ़ियों पर नाम अंकित किया गया। व्यक्तित्व व कृतित्व के आकलन के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से प्रबुद्धजनों का एक पैनल बनाया गया है जो तय करता है कि उनके द्वारा कराए गए कार्यों को आधार बनाकर गंगा घाट की सीढ़ियों या अन्य किसी ऐतिहासिक महत्व की दीवार पर उनका नाम लिखा जाए या नहीं। स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से गंगा के घाटों पर कई और नाम दर्ज करने की तैयारी है जिन्होंने घाट निर्माण में बड़ा योगदान किया। इसका पैनल आकलन कर रहा है।

घाट पर लग रहे पांच तरह के साइनेज

स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से घाट पर पांच तरह के साइनेज लगाए जा रहे हैं। गंगा के 20 प्रमुख घाट पर बड़ा साइनेज लग रहा है जिस पर संबंधित घाट का पूरा विवरण दर्ज है। इसमें आध्यात्मिक व पौराणिक महत्व भी अंकित है। दूसरा साइजेन लोकेशन बताएगा। तीसरा स्टेप साइनेज है जिस पर घाट से संबंधित संक्षिप्त जानकारी के साथ ही घाट पुनर्निमाण में बड़ा योगदान देने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम भी लिखा जा रहा हे। इसके अलावा तीन अन्य साइनेज हैं जो पर्यटकों के लिए जरूरी जानकारी देंगे।

क्यूआर-कोड से भी मिलेगी जानकारी

जिस साइनेज पर घाट का नाम लिखा रहता है। इस बोर्ड पर क्यूआर-कोड लगाया जाएगा। इसे स्कैन करते ही उस घाट की पूरी जानकारी उस पर्यटक के मोबाइल पर आ जाएगी। बड़ी ही आसानी से वह पर्यटक घाट का इतिहास व महत्व जान जाएगा। इस पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। क्यूआर-कोड का साइनेज गंगा के सभी 84 घाट पर लगाए जाएंगे।

पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक साइनेज लगाए जा रहे हैं

स्मार्ट सिटी योजना के तहत गंगा घाट का पुनर्निमाण किया जा रहा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक साइनेज लगाए जा रहे हैं जिस पर घाट संबंधित पूरी जानकारी अंकित रहेगी। क्यूआर-कोड भी होगा जिसे स्कैन कर जानकारी ली जा सकेगी। खास यह कि घाट पुनिर्माण में जिन लोगों ने बड़ा योगदान दिया है उनका नाम भी सीढ़ियों के पत्थर पर अंकित हो रहा है।

गौरांग राठी, नगर आयुक्त व सीईओ स्मार्ट सिटी कंपनी

 

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