माफ हो बिजली बिल और वापस हो एफआइआर, वाराणसी में बोले व्‍यापारी नेता बनवारी लाल कंछल

वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिए लगे कर्फ्यू के दौरान का बिजली बिल माफ किया जाए। यह कहना है उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बनवारी लाल कंछल का। बुधवार को लक्सा स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान बोल रहे थे।

Saurabh ChakravartyWed, 28 Jul 2021 06:04 PM (IST)
कंछल बुधवार को लक्सा स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में पत्रकार वार्ता करते हुए।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव के लिए लगे कर्फ्यू के दौरान का बिजली बिल माफ किया जाए। साथ ही बैंक लोन, नगर निगम, जिला पंचायत, नगर पंचायत, नगर परिषद एवं मंडी विभाग की दुकानों के किराए की माफी की जाए। यह कहना है उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद बनवारी लाल कंछल का। कंछल बुधवार को लक्सा स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में पत्रकार वार्ता के दौरान बोल रहे थे।

उन्होंने सरकार से मांग की कि कोरोना महामारी के दौरान प्रदेश के सभी जिलों, तहसीलों में व्यापारियों का भारी नुकसान हुआ है। दुकान के कर्मचारियों को वेतन तक देने में भारी परेशानी हो रही है। बिक्री बंद होने के कारण प्रदेश के बाहर से आने वाले माल का भुगतान न भेज जाने से माल मिलना मुश्किल हो गया रहा है।

कंछल ने यह भी कहा कि इस समय प्रदेश में शनिवार, रविवार दो दिनों की साप्ताहिक बंदी चल रही है। बंदी और मंदी के कारण व्यापारी इस समय पीड़ित है। सरकार ने उसे किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी है। इसलिए सरकार से दो दिनों की साप्ताहिक बंदी समाप्त करके पूर्व की साप्ताहिक बंदी बहाल की मांग की है। आरोप लगाया कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान बिना करण व्यापारियों पर एफआइआर दर्ज किया गया है। मांग किया कि इसे वापस लिया जाए।  इसके अलावा कंछल ने कोरोना के कारण मृतक जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों को 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.