बलिया में एंबुलेंस चालक संघ के जिलाध्यक्ष सहित 250 पर एफआइआर दर्ज, तीन दिनों से हड़ताल पर हैं कर्मचारी

जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले छह सूत्रीय मांगों को लेकर करनई गांव में एंबुलेंस चालक को भी हड़ताल पर रहते हुए धरना-प्रदर्शन करते रहे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलाध्यक्ष सहित ढाई सौ कर्मचारियों पर सुखपुरा थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

Saurabh ChakravartyWed, 28 Jul 2021 03:43 PM (IST)
वास्थ्य विभाग की ओर से जिलाध्यक्ष सहित ढाई सौ कर्मचारियों पर सुखपुरा थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

बलिया, जागरण संवाददाता। जीवनदायनी स्वास्थ्य विभाग 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के बैनर तले छह सूत्रीय मांगों को लेकर करनई गांव में एंबुलेंस चालक बुधवार को भी हड़ताल पर रहते हुए धरना-प्रदर्शन करते रहे। इससे मरीजों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस कर्मचारियों के हड़ताल काे आदेश की अवहेलना मानते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंगलवार की शाम जिलाध्यक्ष सहित ढाई सौ कर्मचारियों पर सुखपुरा थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

एंबुलेंस कर्मचारी काम पर नहीं लौटे। बुधवार को कर्मचारियों से वार्ता करने पहुंचे प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. हरिनंदन प्रसाद ने मरीजों की दिक्कतों का हवाला देते हुए कहा कि आप हड़ताल खत्म करिए और फिर आपसे बात होगी। इस पर कर्मचारी संघ के नेताओं ने कहा कि आप इसकी गारंटी लें कि हमारी मांगे मान ली जाएंगी, लेकिन प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। वार्ता विफल होने के बाद वह मौके से वापस हो गए और कर्मचारी नारेबाजी करते रहे।

कर्मचारियों की यह है मांग

धरना पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व कर रहे संघ के जिला अध्यक्ष रामपाल चौधरी ने कहा कि कोरोना काल में हम चालकों ने जान की परवाह न कर, सरकार के साथ कोरोना से जंग में बराबर के भागीदार बने। हमें कोरोना योद्धा के नाम से नवाजते हुए सम्मानित भी किया गया। लेकिन जरा सी राहत मिलते ही सेवा प्रदाता कंपनी ने हम लोगों को निकालना शुरू कर दिया है। यह हम लोगों को बेरोजगार करने के अलावा अन्य कुछ भी नहीं है। हमारी मांग है कि कोरोना काल में शहीद कर्मचारियों के आश्रितों को 50 लाख रुपये बीमा और सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। एंबुलेंस सेवा के लिए कंपनी बदलने की तैयारी है। कंपनी बदलने पर वेतन में कटौती न की जाए। जब तक सभी एंबुलेंस कर्मियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधीन नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम वेतन, चार घंटे ओवर टाइम और सालाना 23 हजार रुपये महंगाई भत्ता दिया जाए। प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर कर्मचारियों से डीडी न लिए जाएं आदि। इस मौके पर सुदर्शन मिश्र, निलेश कुमार यादव, सत्येंद्र यादव, जगजीवन, राजकुमार यादव, अंजनी यादव, कपिल, अंबुज वीरेंद्र आदि सहित सभी चालक व कर्मचारी शामिल रहे।

वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी में स्वास्थ्य विभाग

मरीजों की दिक्कताें को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंबुलेंसों के परिचालन के लिए वैक्ल्पिक व्यवस्था की तैयारी है। प्रभारी सीएमओ डा. हरिनंदन प्रसाद ने बताया कि जनपद में कुल 80 एंबुलेंस हैं, जिसके 293 चालक व कर्मचारी हैं। उनसे वार्ता का क्रम जारी है। इधर हम वैक्लपिक व्यवस्था कर एंबुलेंस का परिचालन शुरू कराने जा रहे हैं।

 

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