बलिया के सरकारी दफ्तरों में घूमती रही फाइल, जामुन के पेड़ के नीचे दबकर मर गया शायर

एक शायर जामुन के पेड़ के नीचे दब गया है। उसको बाहर निकालने की बजाय सरकारी दफ्तरों में उसको पेड़ के नीचे से निकालने के लिए फाइल तैयार होती है। यह फ़ाइल दफ्तरों में घूमती रहती है और अंतत शायर मर जाता है।

Saurabh ChakravartySun, 26 Sep 2021 07:42 PM (IST)
बलिया के अमृतपाली स्थित स्कूल में जामुन का पेड़ नाटक का मंचन करते सांस्कृतिक संस्था के रंग कर्मी।

जागरण संवाददाता, बलिया। दफ्तरों में फाइल घूमती रही और जामुन के पेड़ के नीचे शायर दब कर मर गया। सरकारी तंत्र और लालफीताशाही पर व्यंग्यात्मक कहानी जामुन के पेड़ की नाट्य प्रस्तुति ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। कृष्ण चन्दर की बहुचर्चित कहानी जामुन का पेड़ की नाट्य प्रस्तुति अमृतपाली स्थित स्कूल में रविवार को किया गया। संकल्प साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था के रंगकर्मियों ने इसे मंच पर अपने शानदार अभिनय से जीवंत कर दिया।

कहानी में एक शायर जामुन के पेड़ के नीचे दब गया है। उसको बाहर निकालने की बजाय सरकारी दफ्तरों में उसको पेड़ के नीचे से निकालने के लिए फाइल तैयार होती है। यह फ़ाइल दफ्तरों में घूमती रहती है और अंतत: शायर मर जाता है। नाटक की बेहतर प्रस्तुति कर कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया, इसमें आनन्द कुमार चौहान, ट्विंकल गुप्ता, अनुपम पाण्डेय, अखिलेश मौर्य, मुकेश चौहान, शुभम द्विवेदी, राहुल रावत, आलोक कुमार ने शानदार भूमिका निभाई। नाटक की मंचीय परिकल्पना और निर्देशन रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने किया। रंगकर्मियों ने कबीर भजन और जनगीत प्रस्तुत किया। गोष्ठी में रामजी तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में यह सत्य है कि लोग साहित्य से दूर होते जा रहे हैं। इसका खामियाज़ा समाज को भुगतना पड़ रहा है। गोष्ठी में डॉ. अमलदार निहार, डॉ. मनजीत सिंह, अशोक ने अपने विचार रखें। इस मौके पर पण्डित ब्रज किशोर त्रिवेदी, श्वेतांक सिंह, समीर पाण्डेय, डॉ. राजेन्द्र भारती, शिवजी पाण्डेय रसराज, शशि प्रेमदेव, उमेश सिंह, उपेंद्र सिंह, रामप्रकाश, अरविंद उपाध्याय, डॉ. कादम्बिनी सिंह आदि मौजूद थे। संचालन अचिन्त्य त्रिपाठी व आभार संजय कुमार ने व्यक्त किया।

 छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करना रासेयो का उद्देश्य : श्री नरहेजी महाविद्यालय नरहीं रसड़ा प्रांगण में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय सेवा योजना के गुण उद्देश्य एवं कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.सुशीला सिंह ने कहा कि युवकों और युवतियों को सही मार्गदर्शन में कार्य करते हुए समाज के विकास में योगदान देना चाहिए। कहा कि सर्वप्रथम 1948 में गठित राधाकृष्णन आयोग के सुझाव में राष्ट्रीय सेवा योजना के गठन की बात की गई व सामुदायिक कार्यों के माध्यम से छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करना राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य बनाया गया। इसलिए हमें अपने जीवन में राष्ट्रीय सेवा योजना को अंगीकार करना चाहिए। इस मौके पर राजेश सिंह, प्रदीप मिश्रा, रामजी सिंह, सुनील दत्त पांडेय, बलिराम राय आदि मौजूद थे। अध्यक्षता डा.सुशीला सिंह व संचालन डा.कृष्णमोहन सिंह ने किया। आभार व्यक्त डा.श्वेता सिंह ने किया।

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