वाराणसी में दस्तक अभियान के साथ शुरू हुआ फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, घर–घर खिलाई गई दवा

वाराणसी में सोमवार से दस्तक अभियान की शुरुआत के साथ ही फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की भी शुरुआत हुई। इसका शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर सीएमओ डा. वीबी सिंह व दिल्ली से पहुंची टीम ने किया।

Abhishek SharmaMon, 12 Jul 2021 06:21 PM (IST)
फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की भी शुरुआत वाराणसी में हुई।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। जनपद में सोमवार से दस्तक अभियान की शुरुआत के साथ ही फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की भी शुरुआत हुई। इसका शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर सीएमओ डा. वीबी सिंह व दिल्ली से पहुंची टीम ने किया।

सीएमओ डा. सिंह ने जनपदवासियों से अपील की है कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी दवा का सेवन जरूर करें, ताकि फ़ाइलेरिया बीमारी का जनपद से उन्मूलन हो सके। इसके बाद टीम ने चौकाघाट क्षेत्र में हुकुलगंज और लकड़ी मंडी इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होने जन समुदाय से फाइलेरिया रोधी दवा खाने की भी अपील की। इसके साथ ही आज जनपद के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में आशा, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन अपने समक्ष कराया। एसीएमओ डा. एसएस कनौजिया ने बताया कि फ़ाइलेरिया यानी हाथीपांव से ग्रसित व्यक्तियों को खोजा जायेगा।

जनसमुदाय में फ़ाइलेरिया और अधिक न फैले इसके लिए डीईसी (डाई एथायिल कर्बमाजिन) व एल्बेंडाज़ोल और आइवरमेक्टीन की तीन दवाइया सभी ब्लॉक को प्राप्त करा दी गयी हैं। एक स्वस्थ आदमी के अंदर भी फाइलेरिया के विषाणु होते हैं, जिनको मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कार्यक्रम के तहत दवा खिलाकर बीमारी से बचाने का पूरा प्रयास किया जाता है| फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत (आई डी ए) कार्यक्रम 12 से 26 जुलाई तक संचालित किया जा रहा है। अभियान के लिए शहरी व ग्रामीण मिलाकर 3320 ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन टीमें गठित की गयी। इसके साथ ही 662 सुपरवाइजर भी तैनात किए गए हैं।

डा. कनौजिया ने बताया कि इस अभियान में सभी वर्गों के लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी. , अल्बंडाज़ोल तथा आईवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी एवं किसी भी स्थिति में, दवा का वितरण नहीं किया जायेगा। यह गोली दो वर्ष से कम आयु के बच्चो को, गर्भवती और गंभीर रोग से ग्रसित लोगो को नही सेवन करना है। इस दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कृमि मौजूद हैं, दवा खाने के बाद माइक्रोफाइलेरिया के नष्ट होने से ऐसे लक्षण उत्पन्न होते हैं।

रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। इस अवसर पर राष्ट्रीय वेक्टर बोर्न कंट्रोल डीजीज के निदेशक डा. नीरज ढींगरा, संयुक्त निदेशक डा. छवि पंत जोशी, एनटीडी के प्रमुख निदेशक डा. सत्यव्रत राऊत्रे एवं संयुक्त निदेशक डा. अमरेश कुमार, डब्ल्यूएचओ से राज्य समन्वयक डा. तनुज शर्मा, पीसीआई से राज्य समन्वयक डा. ध्रुव सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी शरद चंद पांडे, बायोलोजिस्ट व फाइलारिया नियंत्रण इकाई के प्रभारी डा. अमित कुमार सिंह आदि थे।

फ़ाइलेरिया लक्षण की पहचान : पुरुषों के जननांग में तथा उसके आसपास दर्द या सूजन, पैरों व हाथों में सूजन, हाथीपांव और हाईड्रोसिल। बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग, अभियान में फ़ाइलेरिया से बचाव की दवा जरूर खाएं। कोविड नियम का पालन अवश्य करें। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें , मास्क का इस्तेमाल व हाथों को साबुन से बार- बार जरूर साफ करें।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.