सावन के हर सोमवार पर बन रहा विशेष संयोग, भगवान शिव की स्तुति से मनोकामना पूर्ण होगी

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार इस योग में व्रत और अनुष्ठान करने वालों को देवाधिदेव शिव सौभाग्य के आशीष से अभिसिंचित करेंगे। यम-नियम से शिव की उपासना करने पर साधकों को 12 ज्योतिॄलगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है।

Abhishek SharmaSat, 24 Jul 2021 07:47 PM (IST)
यम-नियम से शिव की उपासना करने पर साधकों को 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है।

वाराणसी [सौरभ चंद्र पांडेय]। शिव का अतिप्रिय माह सावन रविवार से आरंभ हो रहा है। इस विशेष माह में अन्य देवता शयन करते हैं, तो शिव जाग्रत रहते हैं। इस कारण इस माह को शिव की उपासना के लिए विशेष माना गया है। शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग व्रत रखकर रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और महाभिषेक करते हैं। इस बार सावन में सौभाग्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार इस योग में व्रत और अनुष्ठान करने वालों को देवाधिदेव शिव सौभाग्य के आशीष से अभिसिंचित करेंगे। यम-नियम से शिव की उपासना करने पर साधकों को 12 ज्योतिॄलगों के दर्शन के समान फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि अविवाहित कन्याएं मनवांछित वर की प्राप्ति के लिए सावन में शिव की उपासना करती हैं। वहीं, पुरुष दैहिक, दैविक और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए शिव के ध्यान में लीन रहते हैं।

हर सोमवार बन रहा है योगों का विशेष संयोग : पहला सोमवार, 26 जुलाई : पहले सोमवार को धनिष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य योग लगेगा। धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी वसु हैं। यह नक्षत्र रोजगार और व्यापार के लिए बेहद शुभ है। सौभाग्य योग भाग्य को बढ़ाने वाला, यश तथा कीॢतप्रद योग है। इस योग में प्रारंभ किए गए कार्य सरलता से सफल होते हैं। इस योग में जन्म लेने वाला जातक सौभाग्यशाली होता है। धनिष्ठा एवं सौभाग्य योग में शिव की पूजा से धन और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

दूसरा सोमवार, दो अगस्त : इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और कृतिका नक्षत्र लगेगा। कृतिका के स्वामी अग्निदेव हैं। इसे सूर्य का नक्षत्र भी कहा जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य उत्तम फलदायक होते हैं। इस योग और नक्षत्र के संयोग में महादेव का अभिषेक करने से व्यवसाय और नौकरी में तरक्की का मार्ग प्रशस्त होता है।

तीसरा सोमवार, नौ अगस्त : तीसरे सोमवार को श्लेषा नक्षत्र और वरीयान योग का संयोग बन रहा है। श्लेषा को 'आश्लेषा' भी कहते हैं। इसके स्वामी सर्प होते हैं। इस नक्षत्र की समाप्ति से तीन घटी (एक घंटा 12 मिनट) पूर्व का समय विशेष दोषपूर्ण रहता है। वरीयान का अर्थ है अपेक्षाकृत श्रेष्ठ। इस योग में किया गया कार्य नि‍र्विघ्‍न सफल होता है। शिव की स्तुति करने से स्वास्थ्य लाभ एवं मनोरथ पूर्ण होता है।

चौथा सोमवार, 16 अगस्त : चौथे सोमवार को अनुराधा नक्षत्र और ब्रह्मा योग का विशेष संयोग बन रहा है। अनुराधा नक्षत्र में चार या छह तारे रथ के आकार के होते हैं। ब्रह्म योग ब्राह्मणों द्वारा किए जाने वाले कार्यों (जिन्हेंं ब्राह्म कर्म कहा जाता है) के लिए विशेष माना गया है। संन्यास, निर्वाण और मोक्ष दीक्षा के लिए यह योग उपर्युक्त माना गया है। इस नक्षत्र और योग में शिव का पूजन करने से कचहरी में चल रहे मुकदमे से मुक्ति मिलती है।

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