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सावन में हर सोमवार देवाधिदेव का होगा अलग रूप श्रृंगार, वाराणसी में चार एडिशनल एसपी संभालेंगे सुरक्षा की कमान

वाराणसी, जेएनएन। भारत विश्व गुरु है और इसका केंद्र काशी है। इस नगरी से अधिपति भगवान विश्वनाथ संसार को संचालित करते हैैं। भगवान शिव की उपासना का विशिष्ट काल सावन माह है। इसमें उपासना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैैं। बाबा की नगरी काशी में सावन में हर सोमवार उनका अलग-अलग रूप श्रृंगार किया जाता है। इस बार सावन में पांच सोमवार, दो प्रदोष व मास शिवरात्रि पड़ रही है। हर सोमवार विशिष्ट श्रृंगार में अलग ही रंग नजर आता है जो भक्तों को मुग्ध व विभोर कर जाता है। श्रीकाशी विश्वनाथ न्यास परिषद के पूर्व सदस्य पद्मभूषण प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार आध्यात्मिक सिद्धांत के अनुसार सावन में भगवान शिव की उपासना से मानव की कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान हो जाता है।

प्रथम सोमवार-छह जुलाई (मानवाकृत दर्शन) : लिंग पुराण के अनुसार शिव का प्रथम प्राकट्य ज्योतिर्लिंग रूप में हुआ है। सावन में पहले सोमवार को भगवान शिव स्वयं भक्तों के कल्याणार्थ मानवाकृत रूप में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। यह विशिष्ट शृंगार बाबा विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह में सोमवार रात नौ बजे के शृंगार दर्शन में भक्तों को उपलब्ध होगा।

द्वितीय सोमवार-13 जुलाई (शिव शक्ति स्वरुप) : सावन के दूसरे सोमवार को भक्त बाबा विश्वनाथ के शिव-शक्ति स्वरूप का दर्शन करते हैैं। इस दिन बाबा के ज्योतिर्लिंग पर शिवशक्ति के विग्रह विशेष शृंगार भक्तों को उपलब्ध होगा।

तृतीय सोमवार -20 जुलाई (अद्र्ध नारीश्वर दर्शन) : तीसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का अद्र्धनारीश्वर शृंगार किया जाता है। अद्र्धनारीश्वर स्वरूप के संबंध में मनुस्मृति के उल्लिखित वृत्तांत के अनुसार भगवान शंकर ने स्वयं को दो भाग में विभक्त किया। शिव का अद्र्धनारीश्वर स्वरूप अद्वैत भाव व्यक्त करता है।

चतुर्थ सोमवार-27 जुलाई (रुद्राक्ष शृंगार) चौथे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष शृंगार किया जाता है। इसमें रुद्राक्ष के दाने से बाबा की झांकी सजाई जाती है। इसे बाद में प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया जाता है।

पांचवां सोमवार -तीन अगस्त (झूला शृंगार) : सावन के आखिरी सोमवार को बाबा विश्वनाथ का झूला शृंगार किया जाता है। इसमें बाबा भक्तों को चांदी के झूले में सपरिवार (शिव-पार्वती व गणेश) दर्शन देते हैं। यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है।

बाहर से आने वाले कावरियों पर रोक

कोरोना संक्रमण वैश्विक महामारी को देखते हुए सावन में प्रशासन ने पहले ही काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन के लिए बाहर से आने वाले कावरियों के रोक लगा दी है। जिसके कारण हर वर्ष सुरक्षा में लगाए जाने वाले वाली फोर्स में भी कमी की गई। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया की दर्शनार्थियो  के लिए बैरिकेटिंग के अंदर शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए सुरक्षा के दृष्टिगत प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किया गया है। दर्शन करने वाले भक्तों के थर्मल स्कैनिंग कराकर कर ही प्रवेश दिया जाएगा। किसी भी प्रकार की असुविधा ना होगा जिसके लिए हेल्पडेस्क भी बनाया गया है।

एटीएस की भी टीम लगाई गई, ड्रोन कैमरे से हर गतिविधि पर नजर

सुरक्षा के दृष्टिकोण से चार जोन और 20 सेक्टर में विभाजित कर सभी जोन के मुख्य अधिकारी क्षेत्र अधिकारियों को बनाया गया। उन्होंने बताया की चार एडिशनल एसपी, पांच क्षेत्राधिकारी समेत 350 पुलिसकर्मी व चार कंपनी पीएसी बल लगाई जाएगी। साथ एटीएस की भी टीम लगाई गई है।  ड्रोन कैमरे से भी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा गया है जिसमें 40 महिलाओं को सिविल ड्रेस में लगाया गया है किसी तरह की कोई असुविधा ना हो जिसके लिए हर विभाग को अलर्ट कर दिया गया है।

सारनाथ के सारंगनाथ महादेव मंदिर में दूर से होगा दर्शन

कोरोना सक्रमण को देखते हुए श्रावण मास में सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव मंदिर के गर्भगृह के द्वार से ही भक्त दर्शन करेंगे। इसके लिए नगर निगम द्वारा गर्भगृह के तीनों द्वार पर रविवार को गेट लगा दिया गया।  नगर स्वास्थ्य अधिकारी राम सकल यादव ने सफाई व्यवस्था को लेकर जायजा लिया और नगर निगम से लग रहे गेट को भी देखा। मंदिर के प्रमुख पुजारी राम प्यारे पांडेय ने बताया कि कोरोना सक्रमण को देखते हुए दर्शन के लिए भक्तों का गर्भगृह में प्रवेश नही होगा। गर्भगृह के तीनों द्वार पर गेट लगाया गया है। भक्त वही से दर्शन करेंगे। शारिरीक दूरी को देखते हुए भक्तों के कतार वाले स्थान पर गोला बना दिया गया है। मंदिर परिक्षेत्र में एक बार मे 5 भक्त ही दर्शन कर पाएंगे। दर्शन सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक होगा ।

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