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वाराणसी में प्रत्येक औद्योगिक यूनिट में श्रमिकों के लिए होगा डे केयर सेंटर, सभी इकाई में गठित हुए हेल्प डेस्क

श्रमिकों के लिए प्रत्येक डे केयर सेंटर की स्थापना के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं।

औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए प्रत्येक डे केयर सेंटर की स्थापना के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं। वाराणसी में भी इस दिशा में कार्य शुरू हो गए हैं। सभी औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों का तापमान आक्सीजन आदि की जांच हो रही है।

Saurabh ChakravartyFri, 14 May 2021 08:05 AM (IST)

वारणसी, जेएनएन। औद्योगिक इकाइयों में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए प्रत्येक डे केयर सेंटर की स्थापना के निर्देश शासन की ओर से दिए गए हैं। वाराणसी में भी इस दिशा में कार्य शुरू हो गए हैं। चांदपुपुर औद्योगिक आस्थान व करखियांव समेत अन्य औद्योगिक लगभग दो सौ यूनिटों में से अब तक चालीस में इसकी स्थापना की जा चुकी है। शेष में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसकी स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य श्रमिकों को कोविड संक्रमण के दौरान क्वारांटाइन की सुविधा मुहैया हो सके। इसके साथ ही समुचित दवा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

दूसरी तरफ शासन ने आशिंक कर्फ्यू में औद्योगिक इकाइयाें को बंदी से मुक्त करने की घोषणा के साथ ही सभी यूनिट में हेल्प डेस्क गठित करने का निर्देश दिया था ताकि श्रमिकों की नियमित कोविड की जांच हो सके। उपायुक्त उद्योग विरेंद्र कुमार ने बताया कि सभी औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों का तापमान, पल्स आक्सीमीटर से आक्सीजन आदि की जांच हो रही है। इसके साथ ही मेडिकिट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि कोरोना के सिप्टम मिलते ही स्वयं के साथ ही अपने परिवार के लोगों की दवा शुरू कर सकें। सभी औद्योगिक इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि कोविड से बचाव के लिए जारी गाइडलाइन का अनुपालन करें। जांच में गाइडलाइन का अनुपालन होते नहीं मिलेगा महामारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई होगी।

प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से नहीं मिल रही पूरी दवाएं

ग्रामीणों का समय से नहीं हो रहा है एंटीजन और आरटीपीआर जांच जागरण संवाददाता, मिर्जामुराद : गांवों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने के साथ जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झाेंक दी है लेकिन कुछ कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दवा देने के साथ मरीज के साथ लिया सेल्फी और नौकरी पक्की हो गई। ग्रामीणों का समय पर न तो एंटीजन और आरटीपीआर जांच हो रहा है और न ही उन्हें कोरोना दवा किट। पांच दिन की कोरोना दवा किट खत्म होने के बाद ग्रामीणों को खुद दवा खरीदना पड़ रहा है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पूरी दवाएं नहीं मिल रही। स्वास्थ्य कर्मी बुखार की दवा देने के साथ बाहर से खरीदने की नसीहत दे रहे हैं।

 

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