सोनभद्र में दो दिन में 90 मिलीमीटर बारिश होने से सभी नदियां ऊफान पर, जल जमाव को लेकर जगह-जगह प्रदर्शन

सोनभद्र में पिछले दिनों से हो रही मूसलधार बारिश के कारण जलप्रलय जैसे हालात हो गए हैं। आलम यह है कि कई घर गिर गए इसके कारण कई गृहस्थी उजड़ गई है। जनपद के 150 गांव से अधिक स्थानों पर दो दिन से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से ठप है।

Saurabh ChakravartySun, 01 Aug 2021 05:16 PM (IST)
जिले में पिछले दिनों से हो रही मूसलधार बारिश के कारण जलप्रलय जैसे हालात हो गए हैं।

सोनभद्र, जागरण संवाददाता। एक कहावत है अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अर्थ किसी का अति ठीक नहीं होता है। यह बात इस समय सोनभद्र में मानसून पर सटीक बैठ रहा है। जिले में पिछले दिनों से हो रही मूसलधार बारिश के कारण जलप्रलय जैसे हालात हो गए हैं। आलम यह है कि कई घर गिर गए, इसके कारण कई गृहस्थी उजड़ गई है। इसके अलावा जनपद के 150 गांव से अधिक स्थानों पर दो दिन से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। जलजमाव को लेकर जिले के विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। जिले की एकमात्र नगर पालिका राबर्ट्सगंज जलमग्न हो गया है। जिम्मेदार कुछ बोलने को तैयार नहीं है। जिला प्रशासन के अनुसार शुक्रवार व शनिवार को मिलाकर जनपद में 90 एमएम बारिश हो चुकी है, जो दो दिन के अंदर बारिश होने का एक रिकार्ड है।

सदर ब्लाक स्थित दर्जनों गांव बारिश के कारण पूरी तरह से जलमग्न हो गए है। इसके विरोध में रविवार को ग्रामीणों ने वाराण्सी-शक्तिनग राजमार्ग को जाम कर दिया। पुलिस की कड़ी मेहनत के बाद ग्रामीणाें ने जाम हटाया। बिजौल निवासी रमेश प्रसाद, मणिलाल, भोलू, विजेंद्र कुमार, संगम, इंद्रावती, अंबिका प्रसाद आदि ने बताया कि उनके यहां पिछले तीन दिन से चूल्हा नहीं जला है। हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी है। कहा कि अगर जल्द ही कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं कराया गया तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी।

बेलन नदी में ऊफान, तटवर्ती ग्रामीण हलकान

करमा थाना क्षेत्र के करकी ग्राम पंचायत के रजखड़ व कसया कला, जमशोकर, बगही आदि ग्राम पंचायतों के लोग बेलन नदी की चपेट में आ गए हैं। आलम यह है कि स्थानीय ग्रामीणों को स्कूल व सामुदायिक भवन का शरण लेना पड़ रहा है। करकी ग्राम प्रधान प्रवीण कुमार पटेल ने बताया कि शनिवार शाम को क्षेत्रीय लेखपाल को सूचना दे दी गई है। लेकिन अभी तक मौके पर कोई नहीं पहुंचा है। बाढ़ में फंसे लोगों को कैसे बाहर निकाला जाय समझ से परे है। लेखपाल अल्का विश्वकर्मा ने बताया कि बताया कि हमें सूचना मिली है, जल्द ही मुआयना किया जाएगा। नदी के किनारे बसे हुए गांव कसया, कम्हरिया, परसौना, बिरहुलिया, करकी, बसदेवा, बारी महेवा, घेवरी, असना, पतेरी, पगिया, झखाही जैसे गांव बाढ़ से पूरी चपेट में हैं।

 

कनहर ,पांगन, ठेमा व लौवा नदी ऊफान पर

दुद्धी तहसील मुख्यालय के आसपास प्रवाहित होने वाली कनहर, पांगन, ठेमा एवं लौवा नदी में रविवार को भी ऊफान जारी रहा। नदी में भारी जल सैलाब को देखते हुए कनहर सिंचाई परियोजना स्थल अमवार में नदी क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके लिए बकायदे परियोजना स्थल की ओर जाने वाले सभी मार्गो को बैरिकैर्टिंग कर सुरक्षा गार्ड के साथ पुलिस को तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही निचले इलाके में रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वहीं लौवा नदी के रौद्र रूप को देखते हुए शनिवार की शाम से बीड़र गांव के पास हाइवे पर बने अस्थाई रपटे पर सुरक्षा की लिहाज से आवागमन को प्रतिबंधित कर दिया गया है। सभी छोटे-बड़े वाहनों को प्रवर्तित मार्ग से गन्तव्य के लिए रवाना किया जा रहा है। बीड़र ग्राम प्रधान सुरेश चन्द्र के मुताबिक़ गांव की बंधी में दरार आ चुकी है।

गायघाट में विजुल पुल डूबा

मध्यप्रदेश सहित जनपद के पश्चिमी अंचलों में भारी बारिश की वजह से उफान पर आई विजुल नदी ने तटवर्ती क्षेत्रों में दहशत मचाना शुरू कर दिया है। विजुल के ऊफान से ग्राम पंचायत गोठानी के गायघाट में मौजूद पुल शनिवार देर रात डूब गया है। गायघाट में विजुल के जलस्तर में 10 फ़ीट से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गयी है । जिसके कारण पुल से दो फुट ऊपर तक पानी पहुंच गया है। जिससे दर्जनों टोलों का संपर्क कट गया वहीं गायघाट के तटवर्ती खेत भी जलमग्न हो गये। गांव के जयसेन सिंह, श्रीलाल सिंह, भगवंत सिंह, रूपनारायण सिंह, नंदलाल सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों के खेत तक पानी पहुंच गया है। इस बीच विजुल पुल पर लकड़ियां बीनने वाले जान जोखिम में डाल रहे हैं। विजुल का जलस्तर बढ़ने के कारण कन्हरा, केजुआरी, दसहवां, सजा बहरा, नधरी, तेनुहवा, पशहवा सहित दर्जन भर टोले मुख्य मार्गों से कट गए हैं।

 

बारिश के कहर से कई लोग हुए बेघर, सामुदायिक भवन व स्कूल बना सहारा

ऊर्जांचल में गत तीन दिनों से हो रही बारिश से चहुंआेर लोग परेशान हैं। सभी ताल-तलैया व गड्ढे जलमग्न हो गए हैं। संपर्क मार्गों पर निरंतर नाली व बारिश का पानी बह रहा है। निर्माणाधीन फोरलेन कीचड़ से जहां पट गया है, वहीं शक्तिनगर रेलवे पुलिया के समीप जल जमाव से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश का सबसे ज्यादा कहर विभिन्न गांवों में पसरा रहा। तमाम लोगों के कच्चे मकान बारिश में जमींदोज हो गये।

डाला क्षेत्र में हो रही लगातार बारिश ने तबाही मचा दी है। कोटा-अम्माटोला में आधा दर्जन से अधिक घर गिर गए। क्षेत्र में पिछले चार दिनो से हो रही बारिश का सबसे अधिक ्प्रभाव शनिवार-रविवार को देखा गया। बारिश से जहां कई घर धरासाई हो गए वहीं कई घरों में बरसात का पानी भरने से लोगो का रहना दुश्वार हो गया है। चोपन ब्लाक स्थित ग्राम पंचायत कोटा के अम्माटोला में रहने वाले ताराशंकर पुत्र शिवकुमार ने बताया कि रात में हो रहा बारिश के दौरान उसका तीन कमरा ढह गया। गनीमत रहा कि वह दूसरे कमरा में थे।

बीजपुर थाना क्षेत्र के महुली, पिंडारी , लीलाडेंवा में शनिवार की रात हुई मूसलाधार बारिश के कहर से छह गरीब परिवारों का कच्चा मकान जमींदोज हो गया। जानकारी के अनुसार महुली गांव के राकेश पुत्र धनराज धरिकार का रिहायसी मकान में पानी भर जाने के कारण पूरा घर जमीन पर बैठ गया। गनीमत रही कि परिवार उस समय पड़ोस के घर किसी काम से गया था जिसकी वजह से लोगों की जान बच गयी। वहीं पिंडारी गांव के सेवकामोड पर सीताराम, रामदुलारे, उदयचंद, बूडा पिंडारी में रामाधीन का मकान बारिश की भेंट चढ़ गया।

बारिश से जिला कारागार का रास्ता बंद

लगातार हो रही बारिश के कारण जिला जेल का संपर्क मार्ग मुख्य मार्ग से पूरी तरह से कट गया। जल जमाव के कारण मारकुंडी स्थित अंडराग्राउंड पुलिया डूबने से यह समस्या उत्पन्न हुई है शनिवार शाम से ही दो व चार पहिया वाहनों उक्त पुलिए से नहीं निकल पाए हैं। कुछ वाहन चालक जल जमाव से अपनी वाहन निकालने का प्रयास किया, लेकिन पानी में ही उनके वाहन खराब हो कर खड़े हो गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने जल निकासी के लिए मोटर लगाया हुआ है।

 

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