वाराणसी में डक्ट बनाकर शिफ्ट की जाएगी पेयजल पाइप लाइन, लीकेज दुरुस्त करने के लिए सड़कों की खोदाई से मिलेगी मुक्ति

सड़कों को बार-बार खोदाई से बचाने के लिए डक्ट बनाने पर मंथन हो रहा है। पीडब्ल्यूडी को नोडल विभाग बनाया गया है। जल निगम बिजली विभाग दूर संचार विभाग गेल आदि विभागों को भी प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है।

Saurabh ChakravartyTue, 14 Sep 2021 08:44 PM (IST)
अब पेयजल लीकेज व सीवेज ओवरफ्लो जैसी शिकायतों के लिए सड़कों की खोदाई नहीं करनी होगी।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। अब पेयजल लीकेज व सीवेज ओवरफ्लो जैसी शिकायतों के लिए सड़कों की खोदाई नहीं करनी होगी। इतना ही नहीं यदि बिजली के तार, गैस पाइप, आप्टिकल केबल आदि बिछाने के लिए भी सड़कों को खोदना नहीं पड़ेगा। इसके लिए डक्ट बनाने का काम होगा जिसका प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

इस कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं, जल निगम, बिजली विभाग, गेल, टेलीकाम कंपनी, स्मार्ट सिटी आदि संस्थाएं सहयोगी के तौर पर काम कर रही हैं। इस मामले में जल निगम ने कवायद पूरी कर दी है। आशापुर से पांडेयपुर व मकबूल आलम रोड का माडल के तौर पर चयन किया गया है। जल निगम ने अपनी पाइप लाइनों को लेकर प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है जबकि अन्य विभागों की ओर से प्रोजेक्ट संलग्न करना शेष है। सभी विभागों के प्रस्तावों को एकत्र कर पीडब्ल्यूडी डक्ट निर्माण में होने वाले व्यय का आकलन करेगा। इसके बाद दोनों माडल सड़कों के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।

बार-बार सड़कों की होती है खोदाई

आशापुर से पांडेयपुर व मकबूल आलम रोड को नजीर के तौर पर लें तो इस वित्तीय वर्ष में करीब आधा दर्जन स्थानों पर आशापुर से पांडेयपुर के बीच खोदाई की गई है। पेयजल पाइप लाइन में लीकेज बड़ी वजह बनी। ऐसे ही मकबूल आलम रोड की खोदाई की गई।

शिफ्ट होगी पाइप लाइन

चूंकि, आशापुर से पांडेयपुर के बीच पेयजल पाइप लाइन जब बिछाई गई थी तो उस वक्त सड़क कम चौड़ी थी। बीच में डिवाइडर नहीं बने थे। तब पाइप लाइन सड़क के किनारे थी। अब सड़क चौड़ी कर दी गई जिसके बाद पेयजल पाइप लाइन बीच में आ गई। भारी वाहनों के गुजरने से बार-बार लीकेज हो रहा है।

खोदाई से बचाने के लिए डक्ट बनाने पर मंथन हो रहा है

सड़कों को बार-बार खोदाई से बचाने के लिए डक्ट बनाने पर मंथन हो रहा है। पीडब्ल्यूडी को नोडल विभाग बनाया गया है। जल निगम, बिजली विभाग, दूर संचार विभाग, गेल आदि विभागों को भी प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है।

-आर रंजन, परियोजना प्रबंधक जल निगम

 

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