डाक्‍टर की सलाह : इंसेफलाइटिस या दिमागी बुखार है मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारी

अब तक पूर्वांचल और बिहार में दिमागी बुखार को चमकी बुखार नवकी बीमारी एन्सेफेलाइटिस आदि कई नामों से जाना जाता है। बीमारी से बचाव के लिए इसके लक्षणों को जानना उनसे बचाव करना और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है।

Abhishek SharmaFri, 11 Jun 2021 06:50 AM (IST)
दिमागी बुखार को चमकी बुखार, नवकी बीमारी, एन्सेफेलाइटिस आदि कई नामों से जाना जाता है।

बलिया, जेएनएन। दिमागी बुखार को चमकी बुखार, नवकी बीमारी, एन्सेफेलाइटिस आदि कई नामों से जाना जाता है। बीमारी से बचाव के लिए इसके लक्षणों को जानना, उनसे बचाव करना और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना आवश्यक है। यह बातें जिला महिला चिकित्सालय स्थित प्रश्नोत्तर केंद्र पर तैनात वरिष्ठ नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ मणि दुबे ने कही। वह दिमागी बुखर के संबंध में दैनिक जागरण से बातचीत कर रहे थे। उन्होेंने कहा कि इंसेफलाइटिस या दिमागी बुखार वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। मानव मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इन्हीं कोशिकाओं के संक्रमण और सूजन से यह मस्तिष्क में पहुंच जाता है। उसे एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है। दिमागी बुखार जब शरीर में पहुंचता हैं तो खून में जाकर उनका प्रजनन शुरू हो जाता है और इनकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।

दिमागी बुखार के लक्षण : डा. दुबे बताते हैं कि इस बीमारी की शुरुआत में बच्चों को तेज बुखार आता है। इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है। शरीर का चमकना, झटके आना, पूरे शरीर में सिर में दर्द होना, मितली या उल्टी आना, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना। चलने में परेशानी होना, लकवा जैसे लक्षणों का प्रकट होना आदि।

लक्षण दिखने पर तत्काल कराएं उपचार: यदि बच्चे में उपरोक्त में से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल उसका उपचार कराना चाहिए। बच्चे को एक शांत कमरे में, रोशनी से दूर आराम करने दें। यदि बच्चे को झटका आ रहा है तो उसे दाएं या बाएं करवट लेटा कर ही अस्पताल ले जाएं। उसकी गर्दन को सीधा रखें और अगर मुंह से झाग या लार निकल रहा है तो उसे समय-समय पर साफ करते रहें ताकि बच्चे को सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो।--बचाव के उपाय दिमागी बुखार से बचाव के लिए टीका निर्धारित समय पर अवश्य लगवाएं। अत्यधिक गर्मी या धूप से बच्चे को दूर रखें। शरीर में पानी की कमी ना होने दें। उन्हें ताजा पका हुआ पौष्टिक एवं सुपाच्य भोजन खिलाएं।

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