पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे का अध्यनरत छात्रों पर नहीं पड़ेगा असर, नए सत्र 2021-22 में सिर्फ प्रवेश लेगा आजमगढ़ विश्वविद्यालय

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे का असर पुराने छात्रों पर नहीं पड़ेगा। उनकी परीक्षा और परिणाम जारी करने की जिम्मेदारी पूर्वांचल विश्वविद्यालय की है। जब तक उनका कोर्स पूरा नहीं हो जाता है वह विश्वविद्यालय से ही जुड़े रहेंगे।

Saurabh ChakravartyWed, 16 Jun 2021 10:10 PM (IST)
पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे का असर पुराने छात्रों पर नहीं पड़ेगा।

जौनपुर, जेएनएन। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे का असर पुराने छात्रों पर नहीं पड़ेगा। उनकी परीक्षा और परिणाम जारी करने की जिम्मेदारी पूर्वांचल विश्वविद्यालय की है। जब तक उनका कोर्स पूरा नहीं हो जाता है, वह विश्वविद्यालय से ही जुड़े रहेंगे।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे की अंतिम मोहर लग चुकी है। 15 जून से आजमगढ़ और मऊ जिले के कालेजों को अलग किए जाने का आदेश जारी हो चुका है। हालांकि आजमगढ़ व मऊ के सभी कालेजों की सत्र 2020-21 की वार्षिक एवं सेमेस्टर परीक्षाएं पूर्वांचल विश्वविद्यालय ही कराएगा। दो अक्टूबर 1987 को स्थापित वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय का यह तीसरी बार बंटवारा हो रहा है। सोनभद्र, चंदौली, मीरजापुर, भदोही, वाराणसी और बलिया के कालेज पहले ही अलग हो चुके हैं। 15 जून को मऊ व आजगमढ़ के चार सौ से अधिक कालेज अलग हो रहे हैं। ऐसे में पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पास अब 529 कालेज ही बचेंगे। जो छात्र पूर्वांचल विश्वविद्यालय से फार्म भरे हैं या अध्यनरत हैं उनकी परीक्षा और परिणाम यहीं से घोषित होगा। नया विश्वविद्यालय आजमगढ़ उन्हीं की परीक्षा कराएगा जो इस बार 2021-22 में प्रथम वर्ष में दाखिला लेंगे।

विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर परीक्षा की कापियों के मूल्यांकन का लिया फैसला

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के चलते सेमेस्टर परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन नहीं हो सका है। संक्रमण कम होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी सप्ताह बीएड, एलएलबी व अन्य सेमेस्टर परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन कराने का फैसला लिया है। इसके लिए संयोजक तक नियुक्त किए जा चुके हैं।

पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 350 बीएड कालेजों की सेमेस्टर परीक्षा और एलएलबी के साथ अन्य सेमेस्टर परीक्षा संपन्न हुए करीब ढाई माह बीत चुका है। मूल्यांकन शुरू होने वाला था कि तभी कोरोना संक्रमण ने जोर पकड़ लिया। इससे बाधित हो गया और परिणाम भी लटक गया। विश्वविद्यालय प्रशासन भी ऊहापोह की स्थिति में था कि सेमेस्टर छात्रों की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन कराया जाए या इन्हें भी प्रमोट किया जाएगा। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार लोग ही उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बारे में कोई निर्णय नहीं ले सके। अब जब सेमेस्टर परीक्षा का परिणाम घोषित करने का निर्णय लिया गया तो कापियों का मूल्यांकन कराने की तैयारी चल रही है।

 

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