वाराणसी में धर्मार्थ कार्य निदेशालय सक्रिय, कमिश्नर को निदेशक का दायित्व, यहीं से संचालित करेंगे गतिविधियां

धर्मार्थ कार्य विभाग का निदेशालय साढ़े तीन दशक बाद सक्रिय होने जा रहा है। शासन ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल को धर्मार्थ कार्य विभाग के निदेशक का भी दायित्व सौंपा है। कमिश्नर निदेशालय के जरिए प्रदेश भर की गतिविधियों की निगरानी करेंगे।

Saurabh ChakravartySun, 20 Jun 2021 04:41 PM (IST)
धर्मार्थ कार्य विभाग का निदेशालय साढ़े तीन दशक बाद सक्रिय होने जा रहा है।

वाराणसी, जेएनएन। धर्मार्थ कार्य विभाग का निदेशालय साढ़े तीन दशक बाद सक्रिय होने जा रहा है। शासन ने कमिश्नर दीपक अग्रवाल को धर्मार्थ कार्य विभाग के निदेशक का भी दायित्व सौंपा है। कमिश्नर निदेशालय के जरिए प्रदेश भर की गतिविधियों की निगरानी करेंगे। शासन ने कहा है कि जब तक किसी की स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल अस्थायी रूप से निदेशक की भूमिका में निदेशालय का संचालन करेंगे।

ïवर्ष 1985 में सृजित धर्मार्थ कार्य विभाग के निदेशालय के गठन को योगी कैबिनेट ने 11 दिसंबर 2020 को मंजूरी दी थी। निर्णय अनुसार निदेशालय बनारस में ही होगा। इसे श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद की ओर से उपलब्ध कराए गए भवन में स्थापित करने की बात थी। इसके अलावा निदेशालय का उप कार्यालय कैलाश मानसरोवर भवन, गाजियाबाद में खोलने का प्रस्ताव था। हालांकि इसे मूर्तरूप अब तक नहीं मिल सका है।

होंगे दो संयुक्त निदेशक

निदेशालय में निदेशक के अलावा दो संयुक्त निदेशक के पद भी सृजित होंगे। साथ ही लेखाधिकारी, कार्यालय अधीक्षक, स्टेनो, स्थापना सहायक, कंप्यूटर सहायक ड्राइवर, अनुसेवक आदि पदों का भी सृजन किया जाएगा।

दूर होगी योजनाओं के संचालन की दिक्कतें

धर्मार्थ कार्य विभाग में निदेशालय न होने से योजनाओं-परियोजनाओं के संचालन में प्रशासनिक कठिनाइयां होती थीं। विभाग प्रदेश में विभिन्न योजनाओं-परियोजनाओं का संचालन करता है। इनमें श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद, श्रीकैलाश मानसरोवर भवन गाजियाबाद का निर्माण व प्रबंधन, वैदिक विज्ञान केंद्र बीएचयू, कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा अनुदान महत्वपूर्ण पौराणिक स्थलों को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित करना, भिनगाराज संकट मोचन हनुमान मंदिर वाराणसी का प्रबंधन भी किया जाता है।

धर्मार्थ संस्थाओं व मंदिरों के व्यवस्थापन से संबंधित कार्यों के निष्पादन के लिए 19 दिसंबर 1985 को अलग से धर्माथ कार्य विभाग का सृजन किया गया था। इसका सिर्फ एक अनुभाग प्रमुख सचिव के नेतृत्व में शासन स्तर पर क्रियाशील है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण व सुंदरीकरण परियोजना शुरू होने के बाद ही इसकी जरूरत महसूस की गई। मंदिर 1983 में अधिग्रहण के बाद से शासन के ही अधीन है।

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