Culture Parliament : नए भारत का भावी स्वरूप तय करेगी संस्कृति संसद, 12 से 14 नवंबर तक वाराणसी में होगा सामाजिक-धार्मिक विमर्श

धर्म व संस्कृति की नगरी काशी में 12 से 14 नवंबर तक गंगा महासभा व दैनिक जागरण की ओर से संस्कृति संसद-2021 का आयोजन होगा। इस संसद में महज सांस्कृतिक और धार्मिक ही नहीं वरन राष्ट्रीय एकता-अखंडता और सामर्थ्‍य को मजबूती देेने वाले विभिन्न पक्षों पर भी मंथन होगा।

Saurabh ChakravartyWed, 15 Sep 2021 06:57 PM (IST)
संस्कृति संसद आयोजन समिति की अध्यक्ष, अभिनेत्री, राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। धर्म व संस्कृति की नगरी काशी में 12 से 14 नवंबर तक गंगा महासभा व दैनिक जागरण की ओर से संस्कृति संसद-2021 का आयोजन होगा। भारतीय संस्कृति के प्रख्यात चिंतक दैनिक जागरण के पूर्व प्रधान संपादक नरेन्‍द्र मोहन की पुण्य स्मृति में हर दो वर्ष पर आयोजित होने वाली यह चौथी संस्कृति संसद होगी। रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होने वाले इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत देश -दुनिया में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतिनिधित्व करने वाले संत-महात्मा, विद्वतजन, राजनीतिज्ञ, उद्यमी, रक्षा विशेषज्ञ, विधिवेत्ता समेत विभिन्न क्षेत्रों के नीति- निर्धारकों को आमंत्रित किया गया है।

संस्कृति संसद आयोजन समिति की अध्यक्ष अभिनेत्री एवं राज्यसभा सदस्य रूपा गांगुली और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने बुधवार को सिद्धिगिरि बाग स्थित ब्रह्म निवास में पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। सांसद गांगुली ने कहा कि अखिल भारतीय संत समिति व श्रीकाशी विद्वत परिषद के संयुक्त मार्गदर्शन में होने वाला वैश्विक आयोजन अपने आप में अनूठा होगा। यह खास संसद न सिर्फ सनातन धर्म व संस्कृति अपितु राष्ट्रीय व वैश्विक परिदृश्य में भारत, समाज और धर्म का स्वरूप तय करेगी। इससे निकलने वाला विमर्श देश के प्राण-तत्व को आलोकित करेगा।

स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि गंगा महासभा और दैनिक जागरण की ओर से पिछली संस्कृति संसद 2019 में कुंभ के अवसर पर प्रयागराज में आयोजित की गई थी। उसी समय संस्कृति संसद -2021 के लिए स्थल का निर्धारण कर लिया गया था। पिछले तीन आयोजनों ने देश में सांस्कृतिक विमर्श की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विधर्मियों के दुष्चक्रों का जवाब भी होगी यह संसद

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि संस्कृति संसद सनातन धर्म पर उठने वाले सभी प्रश्नों के जवाब देगी। सामाजिक विसंगतियों पर चर्चा कर उन्हेंं दूर करने तथा संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति के आलोक के प्रसार की योजना बनेगी। विधॢमयों के दुष्चक्रों का जवाब भी होगी यह संसद।

राष्ट्रीय सामर्थ्‍य, एकता व अखंडता के विभिन्न पक्षों पर होगी चर्चा

संयोजक गोविंदनारायण शर्मा ने बताया कि इस संसद में महज सांस्कृतिक और धार्मिक ही नहीं, वरन राष्ट्रीय एकता-अखंडता और सामर्थ्‍य को मजबूती देेने वाले विभिन्न पक्षों पर भी मंथन होगा। इस मौके पर संस्कृति संसद आयोजन समिति के सचिव और यूथ-40 राजस्थान के अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह राघव, महात्मा ज्योतिबराव फुले विश्वविद्यालय राजस्थान के चेयरपर्सन निर्मल पवार, गंगा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्र, महानगर संयुक्त महासचिव नीरज बदलानी, काशी विश्वनाथ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष सुधीर सिंह, सुबह-ए-बनारस कार्यकारिणी की सदस्य मंजू मिश्र भी उपस्थित थीं।

12 मुख्य सत्र, चार समानांतर

तीन दिवसीय संस्कृति संसद में कुल 16 सत्र होंगे। इसमें 12 मुख्य तो चार इसके समानांतर चलेंगे। इसका उद्घाटन 12 नवंबर को सुबह दस बजे होगा।

12 नवंबर

-उद्घाटन (सुबह दस बजे)

1-सनातन धर्म के अनुत्तरित प्रश्न (दोपहर 1.30 बजे)

2-भारत की प्राचीनतम अखंडित संस्कृति की वैश्विक छाप एवं वर्तमान परिदृश्य (दोपहर तीन बजे)

13 नवंबर

3-ढाई मोर्चों के युद्ध पर भारत (सुबह 10 बजे)

4-राष्ट्रीय सुरक्षा में आम नागरिकों की भूमिका (सुबह 11.30 बजे)

5-हिंदू होलोकास्ट: हिंदू संस्कृति पर दो हजार वर्षों तक हुए हमले (दोपहर 12.30 बजे)

6-उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991 एवं अन्य धार्मिक कानून: धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदुओं का दमन (दोपहर 2.30 बजे)

7-कलियुग की प्रत्यक्ष तीर्थ मां गंगा (शाम चार बजे)

14 नवंबर

8-राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं परंपरागत भारतीय शिक्षा (सुबह दस बजे)

9-कला संस्कृति के आवरण में परोसी जा रही विकृति (सुबह 11.30 बजे)

10- योग: विश्व को भारत का उपहार (दोपहर 12.30 बजे)

11- मंदिर सामाजिक, आॢथक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र कैसे बनें (दोपहर 2.30 बजे)

12-छद्म धर्म निरपेक्षता के नाम पर भारतीय इतिहास के साथ वामपंथियों के षडयंत्र (दोपहर 3.30 बजे)

-समापन सत्र (शाम पांच बजे)

समानांतर सत्र

13 नवंबर

1-हिंदू मंदिरों का प्रबंधन हिंदुओं के द्वारा (सुबह 11 बजे)

2-युगानुकूल आचार संहिता एवं हिंदुओं के धाॢमक निर्णय (दोपहर तीन बजे)

14 नवंबर

3-भारत के प्रत्येक संप्रदाय को शिक्षण एवं सांस्कृतिक संस्थानों के संचालन की स्वतंत्रता (सुबह 11 बजे)

4-एक देश-एक विधान, हमारा देश-हमारे कानून (दोपहर तीन बजे)

 

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