वाराणसी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई चोरी-डकैती के सीमा पार कनेक्शन, नेपाल व बांग्लादेश के अपराधियों से संबंध

शहर व ग्रामीण क्षेत्र में हुई चोरी व डकैती की घटनाओं के विदेशी कनेक्शन सामने आए हैं। इन घटनाओं को अंजाम देने वालों चोरों व डकैतों के संपर्क बांग्लादेश व नेपाल से हैं। स्थानीय समेत प्रदेश के अन्य शहरों में हुई वारदातों में मिला माल दोनों देशों में खपाते हैं।

Saurabh ChakravartyMon, 18 Oct 2021 07:50 AM (IST)
पहले करते हैं रेकी, फिर चादर बिछाकर सोने की आड़ में काटते हैं शटर

जागरण संवाददाता, वाराणसी। शहर व ग्रामीण क्षेत्र में हुई चोरी व डकैती की घटनाओं के विदेशी कनेक्शन सामने आए हैं। इन घटनाओं को अंजाम देने वालों चोरों व डकैतों के संपर्क बांग्लादेश व नेपाल से हैं। स्थानीय समेत प्रदेश के अन्य शहरों में हुई वारदातों में मिला माल उक्त दोनों देशों में खपाते हैं। पिछले दिनों रोहनिया की चंद्रिका नगर कालोनी में रिटायर्ड प्रोफेसर हृदय नारायण राय के घर पर ग्रिल काटकर हुई लाखों की डकैती में शामिल अपराधियों को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था। सभी आरोपित बांग्लादेश के रहने वाले थे। इसी तरह गत 26 सितंबर को कमिश्नरेट के दुर्गाकुंड क्षेत्र स्थित टाइटन घड़ी के शोरूम में लाखों की घडिय़ां चुराई गई थीं। चोरी में शामिल बिहार के मोतीहारी के घोड़ाहसन गांव निवासी सूरज कुमार को भेलूपुर पुलिस ने शनिवार को कमच्छा पावर हाउस से गिरफ्तार कर उसके पास से चोरी की घडिय़ां व तमंचा बरामद किए गए थे। इस मामले के आरोपित सूरज का भी कनेक्शन नेपाल का निकला है। उससे पूछताछ में पुलिस को अहम जानकारियां हासिल हुई हैं। उसका गिरोह प्रदेश के अलावा दिल्ली, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में सक्रिय है। गिरोह के शातिर केवल बिजली, इलेक्ट्रानिक्स व महंगे सामान के शोरूम को निशाना बनाते हैं।

चादर गिरोह नाम से हैं कुख्यात

एसीपी प्रवीण कुमार सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित सूरज का अंतरराज्यीय गिरोह है। इस गिरोह के सभी शातिर घोड़ाहसन गांव के हैं। गिरोह के लोग दो दिन अपने निशाने की रेकी करते हैं। इसके बार रात वहीं चादर बिछाकर सो जाते हैं। मौका देखकर सोने की आड़ में शटर काटकर चोरी की घटना को अंजाम देेते थे। टाइटन घड़ी शोरूम में चोरी के लिए गिरोह ने ऐसा ही किया था। चोरों की तलाश में इनके गांव भी पुलिस गई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। पूरा गांव चोरों का गढ़ हैं। सभी चोरी के अपराध से जुड़े हैं, लिहाजा बाहरी लोगों के आते ह साथियों को सतर्क कर देते हैं। यही कारण था कि सूरज गांव से पकड़ा नहीं जा सका और बाद में उसकी लोकेशन यहां मिली। वह नए लक्ष्य को तलाशने आया था।

सीमा पर करते हैं सौदेबाजी

गिरोह चोरी का माल समेट कर मोतिहारी ले जाते हैं। फिर नेपाल सीमा पर औने पौने दाम में चोरी के माल का सौदा करते हैं। इनके संपर्क नेपाल के अपराधियों से भी होते हैं। महानगरों में पहले गिरोह के कुछ सदस्य पहुंच कर रेकी करते हैं। इसके बाद गिरोह के अन्य शातिरों को बुलाते हैं। बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के पास रुके रहते हैं। शहर में घूम कर टारगेट की तलाश करते हैं।

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