बीएचयू में होगा देश के ‘छठें कृषि विज्ञान कांग्रेस’ का आयोजन, 13 से 16 नवंबर तक जुटेंगे देश भर के विश्वविद्यालयों व शोध संस्थानों के वैज्ञानिक

आगामी 13 से 16 नवंबर तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में देश के ‘छठें कृषि विज्ञान कांग्रेस’ का आयोजन किया जाएगा। इस कांग्रेस में लगभग सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति शोध संस्थानों के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक व देश-दुनिया के शोध छात्र भाग लेंगे।

Saurabh ChakravartyWed, 27 Oct 2021 04:54 PM (IST)
13 से 16 नवंबर तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में देश के ‘छठें कृषि विज्ञान कांग्रेस’ का आयोजन किया जाएगा।

वाराणसी, शैलेश अस्थाना। आगामी 13 से 16 नवंबर तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में देश के ‘छठें कृषि विज्ञान कांग्रेस’ का आयोजन किया जाएगा। इस कांग्रेस में लगभग सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति, शोध संस्थानों के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक व देश-दुनिया के शोध छात्र भाग लेंगे। नेशनल एकेडमी आफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (एनएएएस) व विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिनों तक होने वाले कृषि विज्ञान पर आधारित देश के इस सबसे बड़े आयोजन में कुल 11 सत्रों में ‘ऊर्जा और 21वीं सदी में कृषि की चुनौतियां’ विषय के विविध आयामों पर देश भर के वैज्ञानिक चर्चा करेंगे। इस दौरान कृषि विज्ञान क्षेत्र में अब तक हुए महत्वपूर्ण शोधों व प्रगति को दर्शाती एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसमें कृषि पशुपालन, दुग्ध विकास, कृषि में उद्योगों की भूमिका आदि अनेक विषयों पर विमर्श के साथ ही पूर्वांचल के किसानों को भी उनसे रूबरू होने का मौका मिलेगा।

आयोजन समन्वयक विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के एग्रोइकोनामिक्स विभाग के प्रो. राकेश सिंह ने बताया कि कांग्रेस का लक्ष्य प्रमुख अकादमिक वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शोध छात्रों को एक साथ एक मंच पर लाना है, ताकि वे ऊर्जा और कृषि संबंधित सभी पहलुओं पर अपने अनुभवों को साझा करते हुए शोध परिणामों का आदान-प्रदान कर सकें। शोधकर्ता इस बात पर विमर्श करते हुए अपने शोध प्रस्तुत करेंगे कि किस तरह भूमि और जल प्रबंधन, कृषि मशीनरी, सिंचाई के अर्थशास्त्र, कृषि उत्पादों की ऊर्जा, सटीक खेती, नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि, ऊर्जा विश्लेषण और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को कृषि के माध्यम से समृद्ध बनाया जा सकता है।

भावी नीति निर्माण में सहायक होगी कांग्रेस

प्रो. राकेश सिंह बताते हैं कि इस संसद से निकलने वाले अनुसंधान पहल से कृषि विकास के रास्ते खुलेंगे ही, उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इससे आय, स्थिरता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और आजीविका सुरक्षा बढ़ाने के नए मार्ग प्रशस्त होंगे। संसद में विमर्श के परिणाम से बनने वाले प्रस्ताव देश की कृषि और ऊर्जा संबंधी भावी नीति निर्माण में भी सहायक होंगे।

यह होंगे प्रमुख कार्यक्रम

-कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में हालिया रुझानों, नवाचारों और चिंताओं के साथ-साथ चुनौतियों और समाधान पर प्रख्यात विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा चर्चा

-विषयगत क्षेत्रों पर तकनीकी सत्र

-अखिल भारतीय छात्र विमर्श

-पोस्टर प्रस्तुतियां

-प्रदर्शनी और किसानों के अनुभव

-एनएएस बिजनेस मीटिंग

चार दिनों में होंगे 30 सत्र

चार दिनों के कांग्रेस में कुल 30 सत्रों में विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। अंतिम दिन 29वां सत्र किसानों के लिए होगा तो 30वां सत्र छात्रों की प्रस्तुतियों के लिए होगा।

देश के इन बड़े वैज्ञानिकों का आना तय

पूरा आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा की अध्यक्षता में होगा। बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर होंगे। सम्मेलन में अभी तक आइसीएआर के पूर्व महानिदेशक डा. मंगला राय, कृषि क्षेत्र का नोबल कहे जाने वाले डा. वीपी मेमोरियल पुरस्कार से सम्मानित डा. रतनलाल, अंतरराष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान के महानिदेशक डा. जीबी स्मिथ, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) के महानिदेशक डा. शेखर मांडेय का उद्बोधन सभी वैज्ञानिकों एवं कृषकों को प्राप्त होगा।

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