वाराणसी के हेरिटेज गलियों के स्मार्ट वर्क पर कोरोना का जैमर, मजदूरों की कमी से रूक गया कार्य

दशाश्वमेध वार्ड की कई गलियों को सीवेज सिस्टम व पेयजल की पाइप डालकर छोड़ दिया गया है।

कोरोना संक्रमण ने मानव स्वास्थ्य के साथी बनारस में विकास कार्य को भी प्रभावित किया है। ठेकेदारों को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वक्त पर निर्माण सामग्री नहीं पहुंच रही है। गलियां तो खोद दी गई हैं लेकिन मजदूरों के अभाव में कुछ को दुरुस्त नहीं किया गया।

Saurabh ChakravartyWed, 21 Apr 2021 06:40 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना संक्रमण ने मानव स्वास्थ्य के साथी बनारस में विकास कार्य को भी प्रभावित किया है। हालात ऐसे है कि निर्माण कार्य की गति आधी हो गई है। नजीर के तौर पर गंगा किनारे स्थित पुरानी काशी की गलियों में हो रहे विकास कार्य को लिया जा सकता है। यहां की हेरिटेज गलियों में हो रहे स्मार्ट वर्क पर कोरोना ने मानो जैमर लगा दिया है।

ठेकेदारों को मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वक्त पर निर्माण सामग्री नहीं पहुंच रही है। गलियां तो खोद दी गई हैं लेकिन मजदूरों के अभाव में कुछ को दुरुस्त नहीं किया गया। गड्ढे यूं ही पड़े हुए हैं। इससे स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्मार्ट वार्ड बनाये जा रहे जंगमबाड़ी व दशाश्वमेध समेत अन्य चार वार्डों में काम जहां-तहां रूका पड़ा है। दर्जनों गलियां खोदकर छोड़ दी गई हैं जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। साथ ही इन दिनों उड़ती धूल से लोग परेशान हैं। सर्वाधिक दिक्कत में दमा के मरीज हैं। जहां काम हो भी रहा है वहां बहुत ही धीमी गति से हो रहा है। इलाकाई पार्षद कहते हैं कि

निर्माण कार्य की धीमी गति होने से परेशानियां बढ़ गई हैं

दशाश्वमेध वार्ड की कई गलियों को सीवेज सिस्टम व पेयजल की पाइप डालकर छोड़ दिया गया है। यहीं हाल जंगमबाड़ी वार्ड का है। यहां करीब 12.69 करोड़ से गलियों को स्मार्ट बनाया जा रहा है। पार्षद गोपाल प्रसाद यादव कहते हैं कि गलियों में काम काफी धीमी गति से हो रहा है। न तो सामान ही पहुंच पा रहा है और न जरूरत के हिसाब से मजदूर ही।

रमजान का महीना चल रहा है और सगराबाद की गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया है। यहां के स्थानीय शाहिद भाई रोज गली को बनवाने की शिकायत कर रहे हैं। मैं भी इसकी जानकारी स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों व नगर निगम के अधिकारियों को दे रहा हूं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जगजीवनपुरा व खारीकुंआ से सटी करीब आधा दर्जन गलियों में भी खोदाई करके छोड़ दिया गया है। उड़ती धूल ने गलियों के लोगों को परेशान कर दिया है। पार्षद कहते हैं कि विगत 3-4 महीनों से उन गलियों को बनाना तो दूर समतल भी नहीं गया। वहीं दशाश्वमेध वार्ड के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, धर्मेश्वर महादेव मंदिर, विशालाक्षी मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों को जोड़ने वाली गलियां छोदकर छोड़ी गई हैं। ऊबड़-खाबड़ पथरीले व कंकरैले रास्तों से लोग चोटिल हो रहे हैं।

गुणवत्ता पर भी सवाल

जंगमबाड़ी के पार्षद ने हो रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया है। इसकी लिखित शिकायत भी उन्होंने अधिकारियों से की है।

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