कोरोना में रामबाण है मनोचिकित्सकीय ‘पंचामृत’, व्यायाम से बढ़ता है प्रतिरोधी क्षमता व पाजिटिव हार्मोन के स्राव

कोविड रोगियों की बढ़ती संख्या संसाधनों का अकाल ऊपर से कालाबाजारी व जमाखोरी बेकाबू है। वर्तमान परिस्थिति में मनोचिकित्सकीय पंचामृत रामबाण साबित होगा। सुखद भावनाओं और सकारात्मक विचार से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। यह कहना है बीएचयू के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर आरएन सिंह का।

Saurabh ChakravartyWed, 12 May 2021 04:52 PM (IST)
वर्तमान परिस्थिति में मनोचिकित्सकीय पंचामृत रामबाण साबित होगा।

जौनपुर, जेएनएन। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर से चौतरफा भय, आशंका, असुरक्षा एवं उहापोह का माहौल है। लाखों लोग जान गंवा चुके हैं और अभी भी महामारी का तांडव जारी है। कोविड रोगियों की बढ़ती संख्या, संसाधनों का अकाल, ऊपर से कालाबाजारी व जमाखोरी बेकाबू है। वर्तमान परिस्थिति में मनोचिकित्सकीय पंचामृत रामबाण साबित होगा। सुखद भावनाओं और सकारात्मक विचार से प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। यह कहना है बीएचयू के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर आरएन सिंह का।

डाक्टर आरएन सिंह ने कहना कि कोरोना कोरोना संक्रमण होने पर शुरू में बुख़ार, सूखी खांसी एवं थकान के लक्षण आते हैं। आदमी को तुरंत जांच कराना चाहिए ताकि स्थिति बिगड़ने न पाए। इनके अतिरिक्त शरीर में दर्द, सिर दर्द, गले में खरास, दस्त, स्वाद एवं गंध का न होना, त्वचा या अंगुलियों के रंग में परिवर्तन संक्रमण की गंभीरता दर्शाते है। ऐसे में चिकित्सक से सलाह ज़रूरी हो जाती है।

उन्होंने कहा कि कोरोना का गंभीर रूप अचानक नहीं आता है, बल्कि कुछ प्रारंभिक लक्षण आते हैं और उसी समय संभल जाना चाहिए। इस अवस्था में संक्रमण हल्का होता है, पर वायरस की संख्या बढ़ती है। दूसरी अवस्था में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, कफ बढ़ जाता है। सांस की समस्या आ जाती है। रक्त जमाव भी होता है। तीसरी अवस्था में कोरोना शरीर को और भी कमजोर कर देता है। हृदय एवं किडनी भी संक्रमित हो जाती है। यह गंभीर अवस्था है। संक्षेप में कोरोना के लक्षण पांच-छह दिन के भीतर स्पष्ट होने लगते हैं।

कोरोना के निवारण का ‘पंचामृत’

डा. आरएन सिंह का कहना है कि जिस प्रकार पूजा में प्रयुक्त पंचामृत के बारे में मान्यता है कि उससे मन को शांति मिलती है, ऊर्जा का संचार होता है, आत्मबल बढ़ता है। उसी प्रकार कुछ हार्मोंस हमारी प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं। मन में खुशी का भाव पैदा करते हैं और स्वास्थ्य के संकट को कम करते हैं। इन्हें सुखद भाव वाला हार्मोन कहते हैं।

डोपामाइन हार्मोन सुखद एवं प्रेरक भाव उत्पन्न करता है। सेरोटोनिन हार्मोन अच्छी मनोदशा निश्चित करता है। आक्सीटोसिन हार्मोन विश्वास को बढ़ाता है और एंडॉर्फ़िंन पीड़ा से मुक्ति में सहायक है। ये हार्मोन्स अंतःस्रावी ग्रंथियों उत्पन्न करती हे।

खुद बढ़ाइए सुखद हार्मोन

मनोवैज्ञानिक की सलाह है कि बेहतर प्रतिरोधी क्षमता एवं प्रसन्नता बढ़ाने के संदर्भ में जिन प्रमुख हार्मोंस का उल्लेख किया गया है, आप उन पर खुद भी नियंत्रण कर सकते हैं। आप के आस पास अच्छा परिवेश हो और आप की उचित व्यवहार शैली सुखद भावनाएं एवं सकारात्मक विचार उत्पन्न करते हैं , जो रोगों से लड़ने की क्षमता में इजाफा करते हैं। उन्होंने बताया कि शोधों का निष्कर्ष है कि नियमित व्यायाम से प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है, साथ में यह पाज़िटिव हार्मोन के स्राव को भी बढ़ाता है। मन को प्रसन्न करने वाले कार्यों को करने से खुशी बढ़ती है और इससे संबंधित हार्मोंस सेरोटोनिन एवं एंडार्फ़िन का भी स्राव बढ़ता है। खुशी के भाव को बढ़ाने वाले चार प्रमुख हार्मोंस एवं संकट में हमारी जीवन शैली ही वह ‘पंचामृत ‘है, जो कोरोना की चुनौतियों का सामना करने में हमारे लिए रामबाण की तरह कारगर होगा।

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