संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए छह साल से लगा रहे चक्कर

जगदीशपुर-मंगारी निवासी डा. काशी नाथ मिश्रा ने शास्त्री का एक प्रमाणपत्र का सत्यापन पिछले छह साल से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इसके लिए वह 500 रुपये का ड्राफ्ट व एक शपथ-पत्र भी दे चुके हैं। इसके बाद भी विश्वविद्यालय सत्यापन करने में हीलाहवाली कर रहा है।

Abhishek SharmaMon, 26 Jul 2021 06:20 AM (IST)
सूबे में कई शिक्षकों की डिग्री फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सूबे में कई शिक्षकों की डिग्री फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए शासन के निर्देश पर बेसिक से लगायत उच्च शैक्षणिक संस्थान के शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की नए सत्यापन करा रहा है। उधर जगदीशपुर-मंगारी के निवासी डा. काशी नाथ मिश्रा ने शास्त्री का एक प्रमाणपत्र का सत्यापन पिछले छह साल से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इसके लिए वह 500 रुपये का ड्राफ्ट व एक शपथ-पत्र भी दे चुके हैं। इसके बाद भी विश्वविद्यालय सत्यापन करने में हीलाहवाली कर रहा है।

जनसुनवाई के पोर्टल पर भी कोई सुनवाई न होने से क्षुब्ध डा. काशी ने अब प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि आठ साल पहले जनपद के एक इंटर कालेज में हिंदी प्रवक्ता पद मनमाने तरीके से नियुक्ति की गई। कई उम्मीदवार होने के बावजूद ऐसे व्यक्ति का चयन किया गया, जिसकी बीएड की डिग्री फर्जी है। जनसूचना के अधिकार के तहत संबंधित अध्यापक डिग्री के बारे में संस्कृत विश्वविद्यालय से सूचना मांगने का प्रयास किया।

विश्वविद्यालय ने इसके लिए शपथ-पत्र व बतौर शुल्क 500 का ड्राफ्ट भी जमा कराया। इसके बाद भी अब तक सत्यापन रिपोर्ट नहीं दी। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री ने एसआइटी से जांच कराने का अनुरोध किया है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ साल से कोई सत्यापन लंबित होने की बात खारिज की है। विश्वविद्यालय प्रशासन का का कहना कि सूबे के प्राथमिक विद्यालयों में चयनित 5000 से अधिक अध्यापकों के अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर रिपोर्ट एसआइटी को सौंपी गई थी।

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