ओएलएक्स पर सैनिक बन कर कार के नाम पर ठगी, वाराणसी के लंका थाने में एफआइआर दर्ज

वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र छित्तूपुर निवासी सीताराम तिवारी ने कामर्शियल वेबसाइट पर कार बेचने का विज्ञापन देकर सात हजार रुपये ठगने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया है। भुक्तभोगी ने ओएलएक्स पर जिले के नंबर की अल्टो कार बिक्री करने का विज्ञापन देखा।

Saurabh ChakravartyTue, 03 Aug 2021 08:20 AM (IST)
कामर्शियल वेबसाइट पर कार बेचने का विज्ञापन देकर सात हजार रुपये ठगने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। लंका थाना क्षेत्र छित्तूपुर निवासी सीताराम तिवारी ने कामर्शियल वेबसाइट पर कार बेचने का विज्ञापन देकर सात हजार रुपये ठगने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया है। भुक्तभोगी ने ओएलएक्स पर जिले के नंबर की अल्टो कार बिक्री करने का विज्ञापन देखा। उसमें दिए गए मोबाइल नंबर को मिलाने पर कॉल उठाने वाले ने अपने को जैसलमेर हेडक्वार्टर में सैनिक रवींद्र कुमार और मयूर विहार कालोनी नवलपुर, शिवपुर का रहने वाला बताया।

इसके बाद जालसाज ने अपना परिचय देते हुए कहा कि मेरा ट्रांसफर जम्मू कश्मीर हो गया है इसके कारण कार को एक लाख रुपये में बेच रहा हूं। बातचीत के दौरान उसने कार की बुकिंग के नाम पर 11999 रुपये की मांग की। इसके बाद सीताराम ने पैसा देने से मना कर दिया। जालसाज ने मजबूरी बताकर विश्वास में लेने के लिए ट्रांसपोर्ट की सात हजार की बिल्टी बनाकर भेजा। इसके बाद भुक्तभोगी ने जालसाज की तरफ से दिए गए किशन मीना के खाते में सात हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। अगले दिन जालसाज ने फोन कर कहा कि प्रयागराज में गाड़ी पकड़ गई जिसको छुड़वाने के लिए 14999 रुपये तत्काल चाहिए। इसके बाद कई बार पैसा ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाने लगा। मामला संदिग्ध लगने पर भुक्तभोगी में पुलिस को तहरीर देकर लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया। अभी दो दिन पहले भी सैनिक के नाम पर जालसाज ने 99 हजार रुपये नीलेश उपाध्याय के खाते से उड़ा दिए थे। नीलेश ने चितईपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

निजी बैंक का फर्जी एजेंट बनकर उड़ाए 2500 रुपये

सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव मंदिर के पीछे मलिन बस्ती में सोमवार की शाम को फाइनेंस बैक का फर्जी एजेंट बनकर जालसाज ने बाइक की बकाया किश्त के बहाने युवक से 2500 रुपये लेकर भाग निकला। भुक्तभोगी ने स्थानीय थाने पर इसकी तहरीर दी। जानकारी के मुताबिक मलिन बस्ती के सुल्तान ने एक फाइनेंस बैक से किश्त पर बाइक खरीदने के लिए ऋण लिया था। प्रति माह बकाया किश्त लेने के लिए बैक का एक एजेंट आता था। बकाया किश्त देने का समय होने पर शाम को एक युवक पहुंचा और खुद को फाइनेंस बैंक का एजेंट बताते हुए 2500 रुपये ले लिए। मामला उस समय प्रकाश में आया, जब किश्त जमा करने के लिए फाइनेंस बैंक से फोन आया।

 

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