वाराणसी के रामनगर इलाके में बिना ठिकाने की सीजीएसटी ने फर्जी फर्म पकड़ी, दूसरी में पाई गई कर चोरी

केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने गुरुवार को कर चोरी में संलिप्त पड़ाव स्थित सरिया गाटर आदि बेचने वाली कंपनी श्री मां आयरन पर छापेमारी की। इस दौरान विभाग ने 30 लाख का स्टॉक सीज कर दिया है।

Saurabh ChakravartyFri, 25 Jun 2021 07:40 AM (IST)
सीजीएसटी विभाग ने रामनगर में एक ऐसी फर्जी पकड़ी है जो बिना ठिकाने पर चल रही है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने गुरुवार को कर चोरी में संलिप्त पड़ाव स्थित सरिया, गाटर आदि बेचने वाली कंपनी श्री मां आयरन पर छापेमारी की। इस दौरान विभाग ने 30 लाख का स्टॉक सीज कर दिया है। साथ ही टीम ने सभी दस्तावेज भी सीजकर जांच के लिए ले गई है। यह कंपनी भुल्लन यादव की बताई जा रही है। ये चंदौली के पूर्व सपा सांसद रामकिशुन यादव के समधी बताए जा रहे हैं। वहीं विभाग ने रामनगर में एक ऐसी फर्जी पकड़ी है जो बिना ठिकाने पर चल रही है। फर्जी बिल से 70 लाख रुपये आइटीसी का लाभ लेने के लिए करीब 3.47 करोड़ का बिल वैल्यू दिखा है।

कारोबारियों को सरकार द्वारा दी गई सहूलियत का कुछ लोक जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं। कारोबारियों को कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़े और अधिकारियों की जी हुजूरी नहीं करनी पड़े इसके लिए फर्मों का पंजीयन आनलाइन कर दिया गया है। बावजूद इसके कुछ कारोबारी फर्जी फर्म बनाकर बिल बेच रहे हैं। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) विभाग ने गुरुवार को रामनगर के पते पर बनाई ऐसे ही फर्म को पकड़ा, जिसका सिर्फ कागज पर ही ठिकाना है। सीजीएसटी के आयुक्त ललन कुमार के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त राजेंद्र कुमार, व सहायक आयुक्त आदील अशरफ के नेतृत्व में टीम ने रामनगर के उस स्थान की जांच की जहां फर्म होने का पता दिया गया था। जांच में पया गया कि वाराणसी मेटल एंड अलॉय नाम से यह फार्म सिर्फ कागज पर ही थी। अशरफ ने बताया कि यह फर्म फर्जी बिल बनाकर आइटीसी के लाभ का खेल खेल रही थी। इसकी पूरी जांच की जा रही है। जांच की जा रही है कि इस फर्म ने अन्य किन-किन फर्मों के पास फर्जी बिल से माल भेजा है। अधिकारियों ने बताया कि इस फर्जीवाड़े में संलिप्त किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उधर, दूसरे मामले में पड़ाव स्थित जिस सरिया, गाटर की दुकानपर छापेमारी की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि यहां कंपनी से करीब 10 लाख कर जमा कराया गया है। अभी इस मामले की जांच आगे भी चलेगी। सभी दस्तावेज को सीज कर विभाग में लाया गया है।

 

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