अष्टमी की रात मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, वाराणसी में घरों में सजाई गईं बाल रूप झांकियां

अष्टमी की रात मनाया गया भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव, वाराणसी में घरों में सजाई गईं बाल रूप झांकियां

हर वर्ष की तरह इस बार भी घरों में श्रीकृष्‍ण की बाल रूप झांकियां सजाई। व्रत रखने के बाद रात में मुर्हूत के अनुसार वाराणसी में श्रीकृष्‍ण का जन्म कराकर लोगों ने हवन-पूजन किया।

Publish Date:Wed, 12 Aug 2020 06:40 AM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

वाराणसी, जेएनएन। भादौ कृष्ण अष्टमी पर मंगलवार को गृहस्थजनों ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया। भादौ कृष्ण अष्टमी प्रात: 6: 15 मिनट पर लगी। कोरोना महामारी के कारण जन्माष्टमी पर होने वाले सभी कार्यक्रम पहले ही स्थगित कर दिए गए थे। लोगों ने हर वर्ष की तरह इस बार भी घरों में भगवान की बाल रूप झांकियां सजाई। दिनभर व्रत रखने के बाद रात में मुर्हूत के अनुसार भगवान का जन्म कराकर लोगों ने हवन-पूजन किया। उसके बाद प्रसाद वितरण किया। दिन में भगवान योगेश्वर की झांकी सजाई गई। विशेष रूप से कोरोना रूपी राक्षस का अंत करने के लिए कुछ घरों में भगवान द्वारा कोरोना राक्षस को मारते हुए भी झांकी सजाई गई थी। जो आकर्षण का केंद्र बना रहा। रात में लोगों ने उत्साहपूर्वक कीर्तन, सोहर, गीत-संगीत का कार्यक्रम किया। वहीं भगवान से कोरोना से मुक्ति के साथ ही सभी तरह के भय बाधाओं से मुक्ति की कामना की गई।

आनलाइन देखी एक दूसरे की झांकियां

जन्माष्टमी पर घरों में सजाई गई झांकियां देखने के लिए हर वर्ष लोग एक दूसरे के घर जाया करते थे। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण लोग एक-दूसरे के घर जाने के बजाए फेसबुक लाइव के माध्यम से एक-दूसरे की सजाई गई झांकी का दर्शन किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी धूमधाम से मनाया गया जन्मोत्सव

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े धूमधाम से भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जिले के चोलापुर, हरहुआ, मिर्जामुराद, बड़ागांव, सेवापुरी में लोगों ने घरों में ही भगवान की झांकी सजाकर श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। देर रात गांवों में गीत-संगीत का आयोजन चलता रहा।

महावीर मंदिर में भी मना भगवान का जन्मोत्सव

महावीर मंदिर में भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में दर्शन के लिए बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित था। मंदिर के पुजारियों ने शाम को भगवान के जन्मोत्सव पर कीर्तन किया। देर रात भगवान का जन्म होने पर हवन पूजन किया गया। जिसमें मंदिर के पदाधिकारी ही शामिल रहे।

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