जौनपुर में आवास योजना के लाभार्थी को पुरुष से बना दिया महिला, विभाग से रोक दिया गया पैसा

प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लाभार्थी का पैसा डेढ़ वर्ष बाद भी खाते में नहीं पहुंचा तो कारण जानने पर जो वह सामने आई वह हैरान करने वाला है। पुरुष लाभार्थी के नाम के आगे विभागीय गड़बड़ी के चलते फीमेल दर्ज हो गया है।

Abhishek SharmaMon, 27 Sep 2021 01:31 PM (IST)
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लाभार्थी का पैसा डेढ़ वर्ष बाद भी खाते में नहीं पहुंचा

जौनपुर, जागरण संवाददाता। जिले में विभागीय लापरवाही से पुरुष लाभार्थी के नाम के आगे फीमेल दर्ज होने की वजह से एक लाभार्थी अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटने को विवश है। प्रभावित व्‍यक्ति के अनुसार विभाग की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। 

प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लाभार्थी का पैसा डेढ़ वर्ष बाद भी खाते में नहीं पहुंचा तो कारण जानने पर जो वह सामने आई वह हैरान करने वाला है। पुरुष लाभार्थी के नाम के आगे विभागीय गड़बड़ी के चलते फीमेल दर्ज हो गया है। कार्यालयों का चक्कर लगाने के बाद भी जिम्मेदारों ने उक्त गड़बड़ी क़ो ठीक करना मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन भुक्तभोगी सपरिवार कच्चे मिट्टी के जर्जर मकान में रहने को विवश है। जर्जर कच्‍चा मकान कभी भी धराशाई हो सकता है। मामला नगर पंचायत वार्ड संख्या 25 के पचहटिया मोहल्ले का है।

मोहल्ला निवासी सुकरन निषाद पुत्र मोहनलाल प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभार्थी है। लेकिन डेढ़ साल बाद भी उसके खाते में आवास बनवाने के लिए एक भी किस्त नहीं पहुंची। लाभार्थी डूडा विभाग सहित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। सुकरन निषाद ने स्वयं जांच पड़ताल के लिए जब अगस्त 2021में ऑनलाइन कागज निकलवाया तो कागज में 31जनवरी 2020का लाभार्थी दिखा रहा है।लेकिन विभागीय लापरवाही से लाभार्थी सुकरन निषाद पुत्र मोहनलाल के नाम के आगे फीमेल दर्ज हो गया है।सुकरन का कहना है कि अधिकारियों से सम्पर्क करने पर उनका कहना हैं कि कागज में तुम्हे महिला बना दिया गया है। इस कारण भुगतान नहीं हो रहा है।

सुकरन की पत्नी रेखा ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी होने के बाद भी खाते में पैसा अभी तक  नहीं आया है। हो रही बरसात से मिट्टी का कच्चा मकान कभी भी जमींदोज हो सकता है। सुकरन ने कच्चे मकान में बिजली का कनेक्शन भी ले लिया है। लेकिन पक्के मकान की आस अब - तक अधूरी है। लाभार्थी का पैसा कौन डकार गया यह सवाल भुक्तभोगी परिवार के मन में कौंध रहा है। सुकरन व पत्नी रेखा ने मामले की जांच कर कार्यवाही करने की अपील जिलाधिकारी से की है।

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