बलिया में उच्च प्राथमिक विद्यालय से बिजली चोरी कर रहा था बीएसए कार्यालय, लखनऊ विजिलेंस टीम का छापा

स्कूल परिसर में लगा मीटर, इसी से बीएसए कार्यालय में दिया अवैध कनेक्शन।।

बलिया के एक प्राथमिक स्कूल के पास बिजली का कोई कनेक्शन नहीं है। वह खुद कटिया डालकर बिजली इस्तेमाल करते ही हैं साथ में उन्होंने कई दुकानदारों को कनेक्शन बांट दिया है। इसके बदले वह सबसे मासिक रुपये भी लेते हैं।

Saurabh ChakravartyFri, 05 Mar 2021 04:41 PM (IST)

बलिया, जेएनएन। लखनऊ की विजिलेंस टीम ने शुक्रवार की दोपहर बीएसए कार्यालय के परिसर में स्थित आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय में छापेमारी की। यहां अवैध तरीके से बिजली का प्रयोग करते हुए पाया गया है। विद्यालय के तार से आधा दर्जन दुकानदार भी बिजली का उपयोग करते थे। वहीं तहसील स्कूल कैंपस के कनेक्शन से बीएसए कार्यालय व बीआरसी को जोडऩा पाया गया। इस मीटर की क्षमता दो किलोवाट थी, जबकि इस पर लोड तीन किलो से भी अधिक मिला।

विद्युत विभाग के प्रर्वतन दल को शिकायत मिली कि आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय में बिना कनेक्शन का बिजली उपयोग किया जा रहा है। केबिल से सड़क पर आधा दर्जन दुकानदारों को भी कनेक्शन दिए गए हैं। इस पर प्रर्वतन दल के राम नगीना यादव के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की। तहसीली स्कूल के नाम से मात्र एक कनेक्शन मिला। उसमें लगे मीटर से निकले केबिल के बीच से बीएसए कार्यालय और बीआरसी में विद्युत सप्लाई मिली। टीम के पूछताछ करने पर तहसीली स्कूल के प्रधानचार्य द्वारा दो किलो वाट के कनेक्शन का कागज दिखाया गया। इसे टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।

टीम के आने की भनक पर सड़क पर कटिया से विद्युत जलाने वाले केबिल उतार लिए। वहीं आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय द्वारा कोई कागज नहीं दिखाया जा सका। प्रर्वतन दल के अवर अभियंता बृजेश कुमार ने बताया कि तहसीली स्कूल में एक कनेक्शन मिला। इसमें से ही बीएसएस कार्यालय में सप्लाई ली गई थी। बीएसएस कार्यालय के नाम से कोई कनेक्शन नहीं है। बीएसए कुछ बोलने से कन्नी काट गये जबकि कार्यालय के स्टेनो संजय कुंवर ने बताया कि बिजली का कनेक्शन विभाग का है। कार्यालय बदलता रहा है। बकाया बिल भुगतान के लिए चार बार विद्युत विभाग की टीम आ चुकी है। कनेक्शन नहीं है तो नोटिस देकर कनेक्शन काट देना चाहिए था।

शहर के रामलीला मैदान स्थित आदर्श उच्च प्राथमिक विद्यालय में सैकड़ों बच्चे पंजीकृत हैं, यहां हर बच्चा किताबों के बदले शिक्षकों से बिजली चोरी का चैप्टर पढ़ते रहे। हनुमानगंज परिक्षेत्र के इस पाठशाला के प्रधानाध्यापक संजय धीरज को स्कूल की जिम्मेदारी संभाले महीनों हो गये, लेकिन एक बिजली कनेक्शन के लिये उन्होंने आवेदन नहीं किया। कनेक्शन लेकर बिजली जलाते तो यकीनन स्कूल का सिर फक्र से ऊंजा होता, लेकिन विजिलेंस की कार्रवाई में विद्यालय का दामन दागदार हो गया।

पूर्व प्रधानाध्यापक पर वे आंतरिक चार्ज हैंडओवर नहीं करने की बात कह रहे हैं तो इसमें दोष भला बिजली विभाग का कैसे हो सकता है। उन्हें कनेक्शन के लिये किसने रोका था। क्यों स्कूल की बिजली रेवड़ी की तरह दुकानदारों को बांटी गई। स्वयं पंखा, कूलर व बल्ब कटिया लगाकर इतने महीने कैसे जलता रहा। इसमें बिजली विभाग के इलाकाई इंजीनियरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। वे सालों से इस खेल के गवाह बने थे, बावजूद इसके गुनाह करने से शिक्षकों को कभी रोका ही नहीं। ठोस कार्रवाई नहीं की। अब चूंकि लखनऊ विजिलेंस टीम ने शिकंजा कसा है तो मामले में कई और बड़े बेनकाब हो सकते हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि यह पुराने प्राधानाध्यपक की लापरवाही का परिणाम है।

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