Ballia के डॉक्टर ने बनाई कनवर्टेबल सिरिंज एसेंबली, इस सिरिंज से 10 से 12 रुपये कम होगा वायल खर्च

डाॅ. सिंह ने बताया कि यह सिरिंज उन्होंने तब बनाई थी जब वह दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में तैनात थे। उत्पाद को पेटेंट कराने के लिये उन्होंने 18 सितंबर 2015 को आवेदन किया था। बौद्धिक संपदा विभाग ने 31 मई 2021 को 20 वर्षों के लिये पेटेंट किया है।

Abhishek SharmaFri, 11 Jun 2021 06:05 AM (IST)
बौद्धिक संपदा विभाग ने 31 मई 2021 को 20 वर्षों के लिये पेटेंट किया है।

बलिया [संग्राम सिंह]। अभी खून की जांच के लिये लोगों को सिरिंज के साथ वैक्यूम वायल की भी जरूरत होती है। इसमें ग्राहक के 10 से 12 रुपये प्रति ट्यूब ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं। अब बहुत जल्द रोगियों को अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। बलिया के चिलकहर स्थित आलमपुर गांव के मूल निवासी डॉ. राणा प्रताप सिंह ने ऐसी कनवर्टेबल सिरिंज बनाई है, जो वायल का भी काम करेगी। इस सिरिंज एसेंबली से खून लेकर खास केमिकल की मदद से स्टोर भी किया जा सकेगा। सिरिंज ही वायल के रुप में परिवर्तित हो जाएगी। अब वायल के लिये ग्राहक को अधिक पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे। डाॅ. सिंह ने बताया कि यह सिरिंज उन्होंने तब बनाई थी, जब वह दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में तैनात थे। उत्पाद को पेटेंट कराने के लिये उन्होंने 18 सितंबर 2015 को आवेदन किया था। बौद्धिक संपदा विभाग ने 31 मई 2021 को 20 वर्षों के लिये पेटेंट किया है।

ऐसी काम करेगी कनवर्टेबल सिरिंज एसेंबली

डा. सिंह ने बताया कि सिरिंज में निडिल लगाएंगे। उसके बाद रोगी का ब्लड निकालेंगे, इसके बाद निडिल को निकाल लेंगे, नीचे नोजल कैप लगाकर बंद कर देंगे। इसी तरह सिरिंज के प्लंजर को भी निकालेंगे, ऊपर भी कैप लगा देंगे। अब यह वायल का काम करने लगेगी। ग्राहक का काम सिर्फ एक सिरिंज से हो जाएगा। अभी वैक्यूम सिरिंज से अगर ब्लड लेते हैं तो एक वायल 14 से 15 रुपये में पड़ता है। लेकिन इस मौजूदा सामान्य सिरिंज के रेट पर ही लोगों को सुलभ हो जाएगा।

चार तरह के मिलते हैं वायल

बलिया जिला अस्पताल के पैथालाजी प्रभारी डा. बीएन गिरी ने बताया कि तीन तरह के वायल बाजार में आते हैं, ईपीए, प्लेन व फ्लोराइड। ईपीए केमिकल वाले वायल में खून का थक्का नहीं बनता, जबकि प्लेन वायल में कोई केमिकल नहीं होता। जबकि फ्लोराइड वायल मधुमेह जांच में इस्तेमाल होता है। वैक्यूम वायल में ज्यादा समय तक खून को रखा जा सकता है। यह बहुत उपयोगी है।

शोधकर्ता डॉ आरपी सिंह का प्रोफाइल

डा. राणा प्रताप सिंह इस समय शहीद हसनखान मेडिकल कालेज मेवात हरियाणा में एनीस्थियोलॉजी के चिकित्सक हैं। उन्हें इंग्लैंड से दो बार स्कॉलरशिप मिल चुकी है। पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर डा. राणा एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद दिल्ली के एम्स व सफदरगंज अस्पताल में दो साल तक सेवाएं दे चुके हैं।

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