वाराणसी में अमृत महोत्सव : नृत्य के भावों में सजी कृष्ण की रासलीला और कथा सियाराम की

देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में बुधवार की शाम राधा-कृष्ण और सियाराम के नाम रही। मणिपुर के कलाकारों ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में नृत्य के भावों में रास रचाया वृंदावन सजाया तो पद्मविभूषण डा. सोनल मानसिंह ने रामचरित मानस के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।

Saurabh ChakravartyThu, 28 Oct 2021 12:11 AM (IST)
अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर रुद्राक्ष में बुधवार से तीन दिवसीय अमृत स्वरधारा- नृत्य एवं संगीत उत्सव की शुरुआत हुई।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में बुधवार की शाम राधा-कृष्ण और सियाराम के नाम रही। मणिपुर के कलाकारों ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में नृत्य के भावों में रास रचाया, वृंदावन सजाया तो पद्मविभूषण डा. सोनल मानसिंह ने रामचरित मानस के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मौका था आजादी का अमृत महोत्सव के तहत संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली और सुबह-ए-बनारस की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अमृत स्वरधारा: नृत्य एवं संगीत उत्सव की पहली निशा का।

कामाख्या कलापीठ सेंटर फार इंडियन क्लासिकल डांसेज नई दिल्ली के कलाकारों ने नृत्य-संगीत कथा सियाराम की को भावों में पिरोकर विभोर किया। ख्यात नृत्यांगना पद्मविभूषण डा. सोनल मानसिंह ने रामचरित मानस के प्रसंगों को विलक्षण शैली में पिरोया। नंदिनी बियानी, शिवानी सेगल, रमेश कुमार, राजा, सुमित मंडल, विनय प्रसन्ना, प्रभात डांगी, परमिंदर सिंह, ऋषि शंकर उपाध्याय, संदीप दत्ता, विश्वजीत वर्मन, सिमराम रैना ने साथ दिया।

जवाहर लाल नेहरू मणिपुर डांस अकादमी, इम्फाल के कलाकारोंं ने मंच संभाला और पुंग चोलम में मणिपुरी रासलीला सजाई। मणिपुरी मृदंगम समेत वाद्य यंत्रों से भक्तिमय कर दिया। सुनील सिंह, सुरजीत सिंह, नानो सिंह, ननतोंबा सिंह, सोभचंद्र सिंह, कला सिंह ने वसंतरास के माध्यम से रासलीला के सूक्ष्म दर्शन को अत्यंत रोचक शैली में प्रस्तुत किया। गोपी-कृष्ण प्रसंग पर आधारित नृत्य-संगीत और रस से परिपूर्ण प्रसंगों ने दर्शकों को आनंदित किया। कृष्ण के रूप में निरीना यामबेम, राधा रूप में चंदन देवी, पारुल देवी, देवला देवी, बबीना चनम, मोनिका देवी, अर्ब्रोशाली राजकुमारी ने गोपियों के भाव की प्रस्तुति दी।

इससे पहले केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दीप जलाकर उत्सव का उद्घाटन किया। कहा कि संगीत और रामकथा अपने आप में महत्वपूर्ण है। मीराबाई को ज्ञान काशी में मिला। काशी और अध्यात्म दोनों विश्व फलक पर अपनी पहचान बना रहे हैं। कलाकारों की प्रतिभा को निखारने के लिए यह मंच बहुत अद्भुत है। इस दौरान डा. रत्नेश वर्मा, डा. विधि नागर, डा. मधुमिता भट्टाचार्य, अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह और प्रतिभागी कलाकारों को मंत्री ने सम्मानित किया। सचिव संगीत नाटक अकादमी टेमसुनारो जमीर, सुनील शुक्ला, उदयप्रताप सिंह, अतुल सिंह, सुरेन्द्र रावत आदि थे।

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