चंदौली जिले में सफेद करेला की सफल खेती के बाद अब लाल भिंडी की होगी खेती

सफेद करेला के साथ-साथ जिले के किसान अब लाल भिंडी की खेती करेंगे। हरी भिंडी की अपेक्षा यह ज्यादा गुणकारी है। कैंसर और शुगर के मरीजों के लिए वरदान है। इसका स्वाद हरी भिंडी के समान है लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है

Abhishek SharmaSat, 19 Jun 2021 08:49 PM (IST)
सफेद करेला के साथ-साथ जिले के किसान अब लाल भिंडी की खेती करेंगे।

चंदौली, जेएनएन। सफेद करेला के साथ-साथ जिले के किसान अब लाल भिंडी की खेती करेंगे। हरी भिंडी की अपेक्षा यह ज्यादा गुणकारी है। कैंसर और शुगर के मरीजों के लिए वरदान है। इसका स्वाद हरी भिंडी के समान है, लेकिन रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है। कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानियों ने बीज तैयार किया है। तैयार बीज फिलहाल प्रदर्शन के तौर पर खेती के लिए किसानों को दिया गया है। नए किस्म की भिंडी कम लागत में अधिक उत्पादन देगी। इसकी खेती किसानों के लिए फायदेमंद होगी।

आमतौर पर हरी भिंडी ही दिखाई देती है। हालांकि आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने लाल भिंडी की प्रजाति विकसित की है। इसका नाम काशी लालिमा रखा है। इसकी व्यापक स्तर पर खेती कराने की योजना बनाई गई है। इसी उद्देश्य से केविके (कृषि विज्ञान केंद्र) में इसका बीज भेजा गया है। केविके परिसर में भी भिंडी उगाई जाएगी। वहीं कृषि विज्ञानियों ने प्रदर्शन के तौर पर खेती के लिए जिले के कुछ चुनिंदा किसानों को भी इसका बीज दिया है। इसका उत्पादन 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताया जा रहा है। वहीं इसकी खेती में कम लागत भी आएगी। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा होगा। कृषि विज्ञानियों ने लाल भिंडी में तमाम तरह के विटामिन होने का दावा किया। इसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।

जिले में सफेद करेला की हो रही खेती

धान के कटोरे में किसान प्रयोग में पीछे नहीं रहते। इलिया क्षेत्र के बरियारपुर गांव में किसान सफेद करेला की खेती कर रहे हैं। हालांकि अभी खुद के इस्तेमाल के लिए खेती की है। इसका परिणाम अच्छा रहा। ऐसे में अब व्यापक पैमाने पर खेती की योजना बनाई है। सफेद करेला के बाद अब लाल भिंडी भी धूम मचाएगी।

गुणों से भरपूर है लाल भिंडी

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व वरिष्ठ कृषि विज्ञानी डाक्टर एसपी सिंह ने बताया कि लाल भिंडी का उत्पादन 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। इसमें पौष्टिकता अधिक है। वहीं इसके सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इस साल किसानों को प्रदर्शन के तौर पर खेती के लिए बीज उपलब्ध कराया गया है।

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