हादसे के बाद जौनपुर में पूरा मोहल्ला करीब तीन घंटे तक जुटा रहा राहत और बचाव कार्य में

पुरातात्विक महत्व की बड़ी मस्जिद के पीछे स्थित वर्ग विशेष की घनी आबादी वाले रौजा अर्जन मोहल्ले में गुरुवार की देररात का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला रहा। उस वक्त करीब 11 बजे थे। अधिकतर लोग नींद के आगोश में थे और बाकी सोने की तैयारी कर रहे थे।

Saurabh ChakravartyFri, 22 Oct 2021 09:12 PM (IST)
रौजा अर्जन वार्ड में मकान गिरने के बाद नीचे दबे लोगो को निकालने के लिये मलबे को हटाते लोग।

जागरण संवाददाता, जौनपुर। पुरातात्विक महत्व की बड़ी मस्जिद के पीछे स्थित वर्ग विशेष की घनी आबादी वाले रौजा अर्जन मोहल्ले में गुरुवार की देररात का मंजर रोंगटे खड़े कर देने वाला रहा। उस वक्त करीब 11 बजे थे। अधिकतर लोग नींद के आगोश में थे और बाकी सोने की तैयारी कर रहे थे। अचानक जोरदार भड़ाम की आवाज से मोहल्ले में कोहराम मच गया।

घबराकर लोग घरों से बाहर निकले तो गर्द व गुबार देख समझ ही नहीं सके कि क्या हुआ है। बस चीखें सुनाई पड़ रही थीं। गुबार छटां तो देखा दिवंगत हो चुके सगे भाइयों कमरुद्दीन व जमालुद्दीन का पुश्तैनी जर्जर सात दशक पुराना घर मलबे में तब्दील हो गया था। उनके सटे पड़ोसी राजमिस्त्री अजीमुल्लाह का टिनशेड भी मलबे के नीचे दबा था। मलबे में दबे दोनों भाइयों के स्वजन की कराह उठ रही थी। किसी का शरीर ईंटों के नीचे दबा हुआ था तो कोई गृहस्थी के सामान में फंसा निकलने की कोशिश कर रहा था। कई मलबे में दबकर नजर ही नहीं आ रहे थे। सभासद साजिद अलीम ने तुरंत जिला व पुलिस प्रशासन को हादसे की सूचना दी। जब तक सरकारी अमला पहुंचता मोहल्लेवासियों को लेकर राहत व बचाव कार्य में जुट गए। शिक्षक शाहिद अलीम, तुफेल अहमद, आसिफ, राजिक, इफ्तेखारूल, सर्फुद्दीन, अब्दुल्लाह, नजमी आदि मलबा हटाने लगे। डीएम मनीष कुमार वर्मा, सदर तहसील के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशु नागपाल, एएसपी (सिटी) डा. संजय कुमार, सीओ सिटी जितेंद्र दुबे, सीओ सदर रणविजय सिंह सदलबल पहुंच गए।

करीब दो घंटे के अथक प्रयास के बाद छह लोगों शन्नो, चांदनी, हेरा, स्नेहा, गयासुद्दीन व असीसुद्दीन को निकाल कर जिला अस्पताल भेजा। स्वजन ने बताया कि अभी भी पांच लोग मलबे में दबे हुए हैं। तब जेसीबी व मोहल्लेवासियों की मदद से बड़ी सावधानी से मलबा हटाकर मरणासन्न हाल में संजीदा, अजीमुल्लाह, सैफ कैफ व मिस्बां को निकाला जा सका। जिला अस्पताल पहुंचाने पर डाक्टरों ने सभी को देखते ही मृत घोषित कर दिया।

सीढ़ी के सहारे बचाए गए मासूम भाई-बहन

दूसरी मंजिल पर ढहने से बच गए कोने में कमरुद्दीन का सबसे छोटा करीब दस वर्षीय पुत्र तजीबुद्दीन व पुत्रियों में सबसे छोटी अलसलाह खड़ी रो रही थी। राहत व बचाव कार्य में जुटे मोहल्ले के युवकों ने बांस की सीढ़ी के सहारे दोनों को सुरक्षित उतार लिया।

रसोई गैस सिलेंडर के ब्लास्ट की होती रही चर्चा

घटना के समय रात में तो कोई समझ ही नहीं सका कि आखिर मकान जमींदोज हुआ कैसे। सभी सिर्फ राहत व बचाव कार्य में लगे रहे। हालांकि शुक्रवार की सुबह यह चर्चा रही कि रसोई गैस सिलेंडर में आग लगने के चलते ब्लास्ट हुआ। लोगों का कहना रहा कि सिलेंडर मकान की छत से टकराया और कंपन होने के चलते जर्जर मकान जमींदोज हो गया। हालांकि जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। पहले तो यही लगा कि किसी तरह की ब्लास्टिंग से ऐसा हुआ होगा, लेकिन मौके से ऐसा कुछ भी नहीं मिला। न ही किसी तरह की किसी गैस की दुर्गंध ही आ रही थी। जमींदोज मकान से दो रसोई गैस सिलेंडर मिले हैं। जो पूरी तरह से सही हैं। किसी तरह की कोई ब्लास्टिंग की बात नहीं है। कहा कि मकान काफी पुराना था जो बारिश के चलते सीलन आने से जमींदोज हो गया।

चूहों ने खोखला कर दिया था नींव

मिट्टी के गारे व ईंट से बने मकान की नींव को चूहों ने खोखला कर दिया था। सात दशक पुराने मकान की छत ईंट से बनी थी। गिरने के बाद छत की सरिया व प्लास्टर टुकड़ों में बिखर गया।

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