पहड़िया मंडी की आढ़त पर आने में डर लगता है साहब, व्‍यापारियों ने कहा- कृपया सड़क बनवा दीजिए

पूर्वांचल की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी पहड़िया में खुले मेनहोल खराब सड़कें और चहुंओर जमा पानी आढ़तियों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। सीवर के लिए खोदी गई सड़क पाइप डालकर जैसे-तैसे हालत पर छोड़ दिया गया।

Saurabh ChakravartyThu, 29 Jul 2021 10:36 AM (IST)
पूर्वांचल की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी पहड़िया में आना-जाना कठिन हो गया है।

वाराणसी, जागरण संवाददाता। पूर्वांचल की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी पहड़िया में खुले मेनहोल, खराब सड़कें और चहुंओर जमा पानी आढ़तियों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। सीवर के लिए खोदी गई सड़क पाइप डालकर जैसे-तैसे हालत पर छोड़ दिया गया। यहां बनाए गए 20 चैंबरों के ढक्कन खुले हुए हैं। शुक्र मनाइए कि इस खुले मेनहोल के चैंबर के कारण कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई। सब कुछ देखते हुए मंडी प्रशासन हादसा होने के इंतजार में बैठे हुए है।

मंडी के व्यापारी हीरालाल मौर्य, रवि सिंह, संतोष सिंह, रमेश सिंह का कहना है कि भोर में मंडी में आने में डर लगता है कि कहीं खुले मेनहोल के कारण कोई हादसा न हो जाए। व्यापारी मंडी में प्रवेश करते हैं और जब तक अपने आढ़त पर सही सलामत पहुंच नहीं जाते हैं तब तक उनकी सांस अटकी रहती है। फल मंडी की हालत तो थोड़ी ठीक है सबसे ज्यादा खराब स्थित सब्जी मंडी की है। अध्यक्ष किशन सोनकर ने बताया कि व्यापारियों की समस्याओं से मंडी के अधिकारियों से अवगत कराया जा चुका है। फिर भी समाधान नहीं हो रहा है। व्यापारी नेताओं का कहना है कि हमारी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो हम मंडी बंद करके आंदोलन करेंगे।

टेंट व्यवसायियों ने की मांग, दो सौ लोगों की अनुमति दो सरकार

बाजार खुलने के बाद टेंट व्यवसायियों ने शादी-सामरोहों में दो सौ लोगों की अनुमति देने के लिए सरकार से मांग की है। वाराणसी टेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बुधवार को बैठक किया। इसमें व्यापारियों ने कहा कि गत दो वर्षों से टेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर ताला लग गया है। उनकी मांग है कि जब बाजार खुल रहे हैं। पचास फीसद क्षमता के साथ सिनेमाघर खुल गया है तब हम लोगों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार क्यों कर रही है। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए अभी भी शहर के 75 फीसद लान खाली हैं। सरकार हमें भी राहत पैकेज दे। यदि सरकार हमारी मांग नहीं मानेगी तो हम आंदोलन को बाध्य होंगे। इसमें मुख्य रूप से गौरव श्रीवास्तव, भीम सिंह, जितेंद्र गुप्ता, प्रकाश कुमार श्रीवास्तव, महेश जायसवाल, धर्मराज पटेल, अनिल मौर्या थे।

 

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