वाराणसी के हरिश्चंद्रघाट पर रात आठ बजे तक 65 शवों का हुआ अंतिम संस्कार, सीएनजी में आठ शव जले

कोरोना के बढ़ते असर का दुष्परिणाम वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर दिखाई पड़ा।

वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर सुबह से ही शवों के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा। बहादुर चौधरी के अनुसार रात्रि आठ बजे तक 65 शवों को जलाया जा चुका था। सामान्य दिनों में यह संख्या सात से आठ तक पहुंचती थी।

Saurabh ChakravartyThu, 15 Apr 2021 09:49 PM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। कोरोना के बढ़ते असर का दुष्परिणाम यहां हरिश्चंद्र घाट पर दिखाई पड़ा। गुरुवार को तो जैसे शवदाह का मेला जैसा गमगीन माहौल दिखाई पड़ा। घाट के चौधरियों के अनुसार रात्रि आठ बजे तक 65 शवों का लकड़ी पर अंतिम संस्कार किया जा चुका था। ऐसी ही कमोवेश स्थिति यहां प्राकृतिक शवदाह गृह में भी दिखाई पड़ी। यहां  कोरोना संक्रमित आठ शवों का जलाया गया।

हरिश्चंद्र घाट पर सुबह से ही शवों के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह देर रात तक चलता रहा। बहादुर चौधरी के अनुसार रात्रि आठ बजे तक 65 शवों को जलाया जा चुका था। सामान्य दिनों में यह संख्या सात से आठ तक पहुंचती थी। उनके अनुसार लकड़ी पर इतनी ज्यादा संख्या में शवदाह कराए जा रहे हैं कि लकड़ी खत्म हो जा रही है। जो ट्रक महीने में एक से दो बार लकड़ियां लेकर आता था वह प्रति दिन लकड़ी ला रहा है और  वह भी जल्दी ही समाप्त हो जा रही है। सीएनजी प्रभारी हृदय प्रकाश दीक्षित के अनुसार गुरुवार को कोरोना पॉजिटिव आठ लाशें जलाई गईं। इनमें छह वाराणसी व दो गाजीपुर जनपद से सम्बंधित थीं। शवदाह करने आये लोगों ने बताया कि घाट पर लकड़ी का दाम ज्यादा बढ़ा दिया गया है। कहा जाता है कि लकड़ी की आवक कम है। स्थानीय लोगों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में शवदाह 1993 में उस समय हुआ था 52 डिग्री तापमान पर लू से ज्यादा लोग कालकवलित हो गये थे।

वाराणसी से बाहर जनपदों के शवों का दाह रोका जाय : सभासद

स्थानीय सभासद राजेश यादव चल्लू ने बताया कि यहां कोरोना पॉजिटिव शवों का लकड़ी पर बेरोक टोक शवदाह हो रहा है जिससे स्थानीय लोगों को आपत्ति हैं। उन्होंने मांग की है कि जनपद के बाहर से आने वालों का शवों का अंतिम संस्कार स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर रोक दिया जाय।

15 हजार में ले रहे कोरोना लाश जलाने का ठीका

घाट पर आए लोगों ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव शवों को जलाने के लिए स्थानीय चौधरी 15 हजार रुपये तक ठीका ले रहे। मनमानी इतनी ज्यादा कि सीएनजी शवदाह गृह या लकड़ी पर जलाने के बाद टिकती ( बांस की ) को फिर से बेचा जा रहा है। जो टिकटी लंका पर 300 रुपये में मिल जा रही है वही यहां लाश से उतारने के बाद छह हजार रुपये तक बेची जा रही है। एम्बुलेंस से लाई गई कोरोना पाजीटिव की लाश लाने वाले परिजन परम्परा का निर्वाह करने के लिए इतनी कीमत देकर खरीद भी रहे हैं। शवदाह में लगने वाले आवश्यक सामग्रियों की कीमत सामान्यतः पांच सौ रुपये होती है लेकिन वर्तमान में दो हजार तक की मनमाना कीमत वसूल की जा रही है।

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